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Justice Ashwani Kumar Mishra की नियुक्ति का विरोध, जानें क्या है विवाद

Justice Ashwani Kumar Mishra

Justice Ashwani Kumar Mishra को हाल ही में केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया है। इस नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार तीखा विरोध जताया है।

Justice Ashwani Kumar Mishra की नियुक्ति और विवाद

पंजाब कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पास कर केंद्र पर आरोप लगाया कि राज्य सरकार की राय का इंतजार किए बिना जल्दबाजी में यह फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे पंजाब के अधिकारों पर हमला बताया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर शपथ ग्रहण समारोह रोकने की मांग की है।

Justice Ashwani Kumar Mishra कौन हैं ?

जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ। उनके पिता श्रीयुत रंग मिश्रा इलाहाबाद और कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज रह चुके हैं। बड़े भाई अजय कुमार मिश्रा उत्तर प्रदेश के एडवोकेट जनरल हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स किया और कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की।

8 मई 1993 को वकील के रूप में नामांकन के बाद उन्होंने सिविल, संवैधानिक और सेवा मामलों में प्रैक्टिस की। नोएडा, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, आईएफएफसीओ, इंडियन ऑयल और यूपी पावर कॉर्पोरेशन जैसी संस्थाओं के लिए बहस की। 2013 में सीनियर एडवोकेट नामित हुए।

3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के अतिरिक्त जज बने और 1 फरवरी 2016 को स्थायी जज। जुलाई 2025 में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में स्थानांतरित किया गया जहां 21 जुलाई को उन्होंने शपथ ली। जून 2026 में जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद वे कार्यवाहक चीफ जस्टिस बने।

चीफ जस्टिस सूर्याकांत की अध्यक्षता में हुई Justice Ashwani Kumar Mishra की नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त 2026 को चीफ जस्टिस सूर्याकांत की अध्यक्षता में उनकी स्थायी नियुक्ति की सिफारिश की। केंद्र ने 5 सितंबर को अधिसूचना जारी कर दी। शपथ 7 सितंबर को निर्धारित थी।

Justice Ashwani Kumar Mishra के खिलाफ भगवंत मान सरकार की आपत्ति

पंजाब सरकार का मुख्य आपत्ति यह है कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के अनुसार राज्य सरकार की राय ली जानी चाहिए थी। केंद्र ने 10 अगस्त के आसपास राय मांगी थी। हरियाणा सरकार और दोनों राज्यों के राज्यपालों ने जल्दी मंजूरी दे दी लेकिन पंजाब ने कोई जवाब नहीं भेजा। केंद्र का कहना है कि अन्य सभी राज्यों ने एक हफ्ते में जवाब दे दिया जबकि पंजाब ने फाइल को लंबा खींचा।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने कहा कि राज्य सरकारों के पास वीटो पावर नहीं है और प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया।

पंजाब सरकार क्यों कर रही है जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति का विरोध ?

विवाद का एक और पहलू जस्टिस मिश्रा की बेंच का एक फैसला है। अगस्त में उनकी डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बकाया महंगाई भत्ता 15 दिनों में चुकाने का आदेश दिया था और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाई थी। पंजाब सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आलोचकों का मानना है कि इसी वजह से राज्य सरकार असहज है।

बार एसोसिएशन ने की निंदा

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने पंजाब सरकार के रुख की निंदा की है। बार का कहना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान का आधार है और राजनीतिक विवाद में इसे नहीं घसीटना चाहिए।

जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति पर बहस 

यह मामला केंद्र-राज्य संबंधों और न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर फिर से चर्चा छेड़ रहा है। एक तरफ पंजाब सरकार संघीय ढांचे और राज्य के अधिकारों की बात कर रही है तो दूसरी तरफ केंद्र और कानूनी विशेषज्ञ प्रक्रिया के पालन और समयबद्धता पर जोर दे रहे हैं। जस्टिस मिश्रा कार्यवाहक के रूप में न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण मुद्दों और जनहित याचिकाओं पर फोकस कर चुके हैं।

अब स्थायी चीफ जस्टिस के रूप में उनकी भूमिका और इस विवाद का आगे का सफर दोनों ही महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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