Harish Rana passive euthanasia: भारत में पहली बार अनुमोदित इच्छामृत्यु का मामला हरीश राणा का है। सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के जीवन रक्षक उपचार हटाने की अनुमति दी थी। अब परिवार ने 32 वर्षीय हरीश को अंतिम विदाई दे दी है।
Harish Rana passive euthanasia case
11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन निवासी 32 वर्षीय हरीश राणा को जीवन रक्षक उपचार हटाने की अनुमति दी थी। यह 2018 के कॉमन काज बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया फैसले का व्यावहारिक लागू होना है। जिसमें गरिमा के साथ मरने के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था।
Harish Rana की कहानी
हरीश राणा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग के टॉपर छात्र थे। 2013 में रक्षा बंधन के दिन पंजाब यूनिवर्सिटी के पेइंग गेस्ट हॉस्टल की चौथी मंजिल से 19 वर्षीय हरीश राणा को गंभीर ब्रेन इंजरी और रीढ़ की हड्डी में चोट लगी। जिससे वे Permanent Vegetative State में चले गए (Quadriplegia, 100% disability)।
वे पिछले 4588 दिन से यानि 13 साल से बिस्तर पर फीडिंग ट्यूब पर निर्भर थे। उनका PGI चंडीगढ़, AIIMS दिल्ली, मेदांता हॉस्पिटल और अपोलो जैसे बड़े अस्पतालों में इलाज हुआ। लेकिन सभी डॉक्टरों ने लाइलाज घोषित कर दिया। परिवार घर पर ही देखभाल कर रहा था।
हरीश राणा के लिए परिवार की 13 साल लड़ाई
63 वर्षीय पिता अशोक राणा और 60 वर्षीय माता निर्मला देवी, छोटा भाई और एक विवाहिता बहन पिछले 13 साल से हरीश के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। अशोक राणा एक होटल में नौकरी करते थे। उनकी 3500 रुपए पेंशन आती है। अशोक राणा ने बेटे के इलाज के लिए घर तक बेच दिया। नर्स और फिजियोथैरेपिस्ट पर हर महीने 27000 रुपए खर्च होते थे। भावनात्मक बोझ भी भारी था-मां हर रोज मालिश करती थी, बातें सुनाती थी, छींक और जम्हाई लेने में उम्मीद बांधती थी।
हरीश राणा का परिवार ब्रह्मकुमारी से जुड़ा हुआ है। 2024 में दिल्ली कोर्ट ने याचिका खारिज की। परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 2025 में कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड बनाए। दोनों ने कहा, स्थिति अपरिवर्तनीय है, रिकवरी की कोई उम्मीद नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का भावुक फैसला
जस्टिस जेबी पादरीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इच्छामृत्यु की अनुमति दी अदालत ने परिवार की सराहना की। कोर्ट ने कहा ,”आप बेटे को छोड़ नहीं रहे हैं, बल्कि गरिमा के साथ जाने दे रहे हैं। यह गहरे प्रेम और साहस का प्रमाण है। 13 साल तक परिवार ने कभी साथ नहीं छोड़ा, यह सच्चा प्यार है। “कोर्ट ने कहा कि जीवन रक्षक उपचार अब ठीक नहीं कर रहा बल्कि मौत को टाल रहा है। फैसला सुनाते वक्त जज पादरीवाला खुद भावुक हो गए थे।
इच्छामृत्यु से पहले परिवार की हरीश राणा को अंतिम विदाई
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तीन दिन बाद 14 मार्च को सुबह हरीशको गाजियाबाद के घर से AIIMS दिल्ली के प्रशामक देखभाल इकाई (Palliative Care Unit) शिफ्ट किया गया। CMO की देखरेख में प्रक्रिया शुरू हुई। घर में सन्नाटा छा गया। परिवार, पड़ोसी, डॉक्टर सब मौजूद लेकिन कोई आवाज नहीं।
मां ने चूमा बेटे का चेहरा
मां निर्मला देवी ने बेटे का चेहरा हथेलियों में थामा, माथा चूमा , हथेली सहलाई। मां ने आंखों से आंसू पोछते हुए कहा , “जिस बेटे को नाज से पाला, 4588 दिन इस दर्द में काटे, लेकिन बेटे की पीड़ा खत्म करने का फैसला उससे भी ज्यादा कष्टदायक है। हम बूढ़े हो रहे हैं , देखभाल कौन करेगा ?”
पिता अशोक राणा ने भर्राए गले के साथ बेटे के बालों पर हाथ फेरा। रोते हुए कहा ,”हमारे बेटे के लिए मौत मुक्ति है, माता-पिता के लिए बच्चे को जाते हुए देखना सबसे गहरा दर्द होता है भाई आशीष ने लक्ष्मण की तरह 13 सॉस सेवा की।
ब्रह्मकुमारी दीदी ने चंदन का टीका लगाकर दी अंतिम विदाई
ब्रह्मकुमारी दीदी ने चंदन का टीका लगाते हुए कहा ,”सबको माफ़ करते हुए, सबसे माफ़ी मांगते हुए अब जाओ, ठीक है। ” ब्रह्मकुमारी दीदी का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जो आंखें नम कर देता है।
हरीश राणा की वर्तमान स्थिति
अब हरीश को AIIMS के पैलिएटिव केयर यूनिट रखा गया है। प्रक्रिया चरणबद्ध और दर्दरहित तरीके से होगी। उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जाएगा। प्रकृति अपना काम करेगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने परिवार को 10 लाख रुपए की सहायता दी है।

