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Sourav और आशुतोष ने Delhi High Court से अपनी याचिका वापस ली

Sourav और आशुतोष ने Delhi High Court से अपनी याचिका वापस ली

Sourav Ashutosh: Delhi High Court ने CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका से उम्र पूछकर कहा कि वे GenZ नहीं हैं। बॉन्ड उल्लंघन पर फटकार के बाद दोनों ने न्यायिक हिरासत के खिलाफ याचिका वापस ले ली।

Sourav और आशुतोष पर Delhi High Court का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत की तीखी टिप्पणियां चर्चा का विषय बन गईं। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने दोनों से उम्र पूछी और साफ कहा कि आप दोनों GenZ नहीं हैं। कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली।

क्या है पूरा मामला ?

दोनों ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाई गई थी। मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़ा है। अक्टूबर में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डीनोटिफाई कर दिया गया था। इसके बावजूद सौरव दास और आशुतोष रांका वहां पहुंचे और राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।

Delhi High Court ने क्या-क्या पूछा?

सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रसाद ने दोनों की उम्र पूछी। वकील ने बताया कि सौरव दास 27 साल के हैं और आशुतोष रांका 31 साल के। कोर्ट ने तब टिप्पणी की, “तब आप GenZ नहीं हैं।” अदालत को बताया गया कि 1997 के बाद जन्मे लोगों को GenZ कहा जाता है। जज ने कहा कि शुरुआत में यह छात्रों का प्रदर्शन था, जिसमें बच्चे भी शामिल थे, लेकिन अब मुद्दा बदल गया है जबकि लोग वही हैं।

कोर्ट ने यह भी पूछा कि बिना अनुमति के जंतर-मंतर क्यों गए, बॉन्ड का उल्लंघन क्यों किया और बैरिकेडिंग तोड़ने में आगे क्यों रहते हैं। अदालत ने कहा कि 10 अक्टूबर को बॉन्ड जमा किया गया और 11 अक्टूबर को ही उसका उल्लंघन हो गया। जस्टिस प्रसाद ने कहा कि जब SEM कोर्ट में सुनवाई हो रही है तो पहले वहां का फैसला आने दें। वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने पर सीधे हाईकोर्ट आने का औचित्य नहीं है।

Sourav Ashutosh ने याचिका वापस लेने का फैसला लिया

कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं के वकील अभिक चिमनी ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने गुण-दोष पर कोई राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। अब SEM कोर्ट में दोपहर 2 बजे सुनवाई होनी है। दोनों कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे।

यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। CJP कार्यकर्ताओं पर सार्वजनिक शांति भंग करने और बार-बार कानून तोड़ने के आरोप लगे हैं। SEM कोर्ट ने पहले भी उनके जमानतदार खारिज किए थे और हिरासत बढ़ाई थी।

दिल्ली हाईकोर्ट की इस सुनवाई ने एक बार फिर याद दिलाया कि अदालतें प्रक्रिया का सम्मान चाहती हैं। सीधे ऊपरी अदालत का रुख करने से पहले निचली अदालत का फैसला आने देना जरूरी है। सौरव दास और आशुतोष रांका अब SEM कोर्ट के आगे अपना पक्ष रखेंगे।

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