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Chorbagan pandal: कोलकाता चोरबागान पंडाल भगदड़ में 18 लोगों की मौत, 26 घायल

Chorbagan pandal: कोलकाता चोरबागान पंडाल भगदड़: 18 लोगों की मौत

Chorbagan pandal stampede: कोलकाता के चोरबागान पंडाल भगदड़ में 18 लोगों की मौत और 25 घायल। जानिए हादसा कैसे हुआ, घायलों का हाल और अब तक क्या पता चला है

Chorbagan pandal stampede: 18 की मौत

कोलकाता में दुर्गा पूजा की रौनक के बीच शनिवार की शाम मातम में बदल गई। पश्चिम बंगाल के चोरबागान पंडाल भगदड़ में कम से कम 18 लोगों की जान चली गई। यह हादसा महासप्तमी की शाम हुआ, जब भारी संख्या में श्रद्धालु पंडाल में दर्शन के लिए जुटे थे। त्योहार की खुशी लेकर निकले कई परिवार अब अपनों की तलाश और अस्पताल के चक्कर में उलझे हैं।

Chorbagan pandal में भगदड़ क्यों हुई ?

कोलकता दुर्गा पूजा में सप्तमी की शाम पंडालों में सबसे ज़्यादा भीड़ उमड़ती है। लोग दिनभर की तैयारी के बाद परिवार के साथ निकलते हैं। चोरबागान में भी यही हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक घायलों को मौके से निकालकर कलकत्ता मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ कम से कम 18 लोगों को मृत घोषित किया गया।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार Chorbagan pandal का एक हिस्सा भीड़ के दबाव में ढह गया, जिससे कई श्रद्धालु घायल हुए। हादसे की ठीक वजह अभी जाँच का विषय है। भीड़ का दबाव, तंग रास्ते या मौसम की मार, इनमें से क्या मुख्य कारण रहा, यह आधिकारिक बयान के बाद ही साफ होगा।

कोलकाता भगदड़ में कितने घायल हुए ?

इंडिया ब्लूम्स की रिपोर्ट  के अनुसार कम से कम 25 लोग घायल हुए हैं और उनमें से 5 की हालत गंभीर बताई गई है। ऐसे हादसों में गंभीर घायलों की हालत तेज़ी से बदल सकती है, इसलिए मृतकों का आँकड़ा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कलकत्ता अस्पताल प्रशासन और पुलिस की ओर से अंतिम संख्या की पुष्टि का इंतज़ार करना ठीक रहेगा।

नेताओं की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं जताई हैं। ममता बनर्जी ने फेसबुक पर चोरबागान पंडाल की घटना पर गहरा दुख और सदमा जताया। प्रशासन से राहत और जाँच को लेकर और बयान आने की उम्मीद है।

भीड़ वाले पंडालों में खतरा कहाँ बढ़ता है?

कोलकाता की दुर्गा पूजा में लाखों लोग एक साथ पंडाल घूमने निकलते हैं। संकरी गलियों वाले इलाकों में एक ही रास्ते से आना-जाना हो तो ज़रा सी अफरातफरी बड़े हादसे में बदल सकती है। बारिश या अचानक अफवाह फैलने पर लोग इधर-उधर भागते हैं और दबाव बढ़ जाता है। इसी वजह से जानकार बार-बार अलग प्रवेश और निकास द्वार, भीड़ की गिनती और स्वयंसेवकों की तैनाती पर ज़ोर देते हैं।

अगर आप पंडाल जा रहे हैं तो

भारी भीड़ दिखे तो अंदर न जाएँ, कुछ देर बाद या अगले दिन आएँ। बच्चों और बुज़ुर्गों का हाथ पकड़कर रखें और निकास द्वार पहले देख लें। भगदड़ जैसी स्थिति में दौड़ने के बजाय भीड़ की दिशा में धीरे चलें और गिरने से बचें। पुलिस और स्वयंसेवकों के निर्देश मानें।

हादसे की जाँच, पंडाल आयोजकों की जवाबदेही और भीड़ प्रबंधन की खामियों पर सवाल उठेंगे। पीड़ित परिवारों के लिए सबसे ज़रूरी है त्वरित इलाज, सही जानकारी और मदद। अपडेट आते ही यह खबर यहाँ बदली जाएगी।

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