Uranium in milk samples: बिहार में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध के सैंपल में यूरेनियम मिला है। शोधकर्ताओं ने 17 से 35 वर्ष की 40 महिलाओं के ब्रैस्ट मिल्क के सैंपल लिए। परिणाम चौंकाने वाले थे।
ब्रैस्ट मिल्क में यूरेनियम की मौजूदगी
हाल ही में बिहार के कई जिलों में स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध के सैंपल में Uranium (U-238) की मौजूदगी का पता चलने वाली खबर ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जनता में चिंता पैदा कर दी है। यह अध्ययन नवंबर 2025 में प्रकाशित हुआ है । यह बिहार के गंगा मैदानी क्षेत्रों में भारी धातुओं के प्रदूषण की एक नई कड़ी जोड़ता है।
Uranium in Breast milk samples
यह शोध “Discovery of uranium content in breast milk and assessment of associated health risks for mothers and infants in Bihar, India” नामक पेपर के रूप में Scientific Reports (नेचर जर्नल का हिस्सा) में 20 नवंबर 2025 को प्रकाशित हुआ। अध्ययन अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 तक चला।
सैंपल लेने वाली संस्थाएं
महावीर कैंसर संस्थान एंड रिसर्च सेंटर, पटना (डॉ. अरुण कुमार और प्रो. अशोक घोष के नेतृत्व में), AIIMS दिल्ली (डॉ. अशोक शर्मा), लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (पंजाब), NIPER-हाजीपुर (बिहार) और ICMR (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) द्वारा समर्थित।
40 महिलाओं के ब्रैस्ट मिल्क में मिला यूरेनियम
बिहार के छह जिलों,भोजपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा से 40 स्तनपान कराने वाली महिलाओं (उम्र 17-35 वर्ष) के दूध के सैंपल लिए गए। ये महिलाएं स्वेच्छा से सहमत हुईं। प्रत्येक महिला से 5 मिलीलीटर दूध एकत्र किया गया।
Uranium युक्त स्तन दूध का विश्लेषण
दूध के सैंपल्स को ICP-MS (इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री) तकनीक से जांचा गया। यह पहली बार है जब बिहार के गंगा मैदानी क्षेत्रों में स्तन दूध में यूरेनियम का आकलन किया गया। पिछले अध्ययनों में बिहार के भूजल में यूरेनियम, आर्सेनिक, लेड और मरकरी की मौजूदगी पाई गई थी, जो इस शोध की पृष्ठभूमि है।
सभी सैंपल में मिला Uranium
Uranium in breast milk samples: सभी 40 सैंपल्स में यूरेनियम (U-238) का पता चला। एकाग्रता 0 से 5.25 µg/L (माइक्रोग्राम प्रति लीटर) के बीच थी। सबसे अधिक यूरेनियम की मात्रा बिहार के कटिहार जिले में पाई गई।
Uranium का स्रोत
Uranium का मुख्य स्रोत भूजल लगता है, जो बिहार में पीने और सिंचाई के लिए प्रमुख है। राज्य में औद्योगिक कचरा, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण बढ़ा है। पहले के शोधों में बिहार के 273 भूजल सैंपल्स में उच्च यूरेनियम पाया गया था।
- कटिहार : सबसे अधिक अधिकतम 5.25 µg/L
- नालंदा : मध्यम-उच्च
- भोजपुर : निम्न-मध्यम
- समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया : 0-3 µg/L
Uranium युक्त स्तन दूध का शिशुओं पर प्रभाव
Uranium in milk samples: अध्ययन के अनुसार, 70% शिशुओं में गैर-कैंसरकारी जोखिम (non-carcinogenic risks) हो सकते हैं। शिशु यूरेनियम को शरीर से कम कुशलता से निकाल पाते हैं। जिससे किडनी क्षति, न्यूरोलॉजिकल विकास में बाधा , हड्डियों का कमजोर होना और लंबे समय में कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। माताओं पर जोखिम कम है, क्योंकि यूरेनियम मुख्य रूप से मूत्र के माध्यम से निकल जाता है और स्तन दूध में कम स्थानांतरित होता है। अध्ययन में माताओं के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं पाया गया।
विशेषज्ञों की राय
AIIMS के डॉ. अशोक शर्मा ने कहा किदूध में Uranium का स्तर कम हैं। इसलिए घबराहट की जरूरत नहीं है, इसलिए स्तनपान जारी रखें। NDMA के एक वैज्ञानिक ने कहा कि यह “कोई चिंता की बात नहीं” है। क्योंकि स्तर WHO की सीमा से नीचे हैं। हालांकि, लंबे समय के प्रभाव की निगरानी जरूरी है।
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