Umpire Manik Gupta dies in bees attack: अनुभवी क्रिकेट अंपायर माणिक गुप्ता की मधुमक्खियों के हमले में मौत हो गई है। हादसा मैच के दौरान उन्नाव में हुआ।
Umpire Manik का निधन कैसे हुआ ?
19 फरवरी 2026 को उन्नाव जिले के शुक्लागंज इलाके के राहुल सप्रू स्टेडियम पर KDMA लीग के अंडर 13 जूनियर मैच के दौरान यह दुखद हादसा हुआ। मधुमक्खी हमले से ठीक पहले माणिक गुप्ता ने एक मैच की अंपायरिंग की थी। मैच खत्म होने के बाद वे साथी अंपायर जगदीश शर्मा से मिलने गए मैदान पर गए। शर्मा दूसरे मैच की अंपायरिंग कर रहे थे। तभी यह हादसा हुआ।
ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान हुआ हमला
Umpire Manik Gupta ड्रिक्स ब्रेक के दौरान अपने दोस्त जगदीश शर्मा के साथ चाय पी रहे थे। तभी मधुमक्खियों का विशाल झुंड मैदान पर टूट पड़ा। खिलाड़ी घास पर लेट गए। जगदीश शर्मा बाथरूम में घुस गए। लेकिन माणिक गुप्ता उम्र और अन्य बिमारियों के कारण तेज नहीं भाग पाए। वे भागने की कोशिश में गिर पड़े। मधुमखियों के झुंड ने उन्हें करीब 10 मिनट तक घेर कर रखा। मैदान पर मधुमखियां उन्हें डंक मारती रहीं। उनके शरीर और चेहरे पर मक्खियां चिपकी हुई थी।
Umpire Manik Gupta की अस्पताल में हुई मौत
मधुमक्खी हमले में गंभीर रूप से घायल अंपायर माणिक गुप्ता को शुक्लागंज के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें कानपूर के लाला लाजपत राय अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल ले जाते समय भी कुछ मधुमखियां उनके शरीर पर चिपकी हुई थी। इस हमले में करीब 20 क्रिकेट खिलाडी और एक अन्य अंपायर भी घायल हुआ। परिवार ने पोस्टमॉर्टम से इंकार कर दिया।
Umpire Manik Gupta कौन थे ?
माणिक गुप्ता एक अनुभवी और सम्मानित क्रिकेट अंपायर थे। जिनकी उम्र 65 वर्ष के करीब थी। वे उत्तर प्रदेश के कानपूर के फीलखाना क्षेत्र के निवासी थे। वे अपने पुश्तैनी मकान में दो भाइयों के साथ रहते थे। उनकी चार बेटियां हैं। जिनमें से तीन की शादी हो चुकी है। उनकी छोटी बेटी इंटर की छात्रा है। परिवार का गुजारा माणिक गुप्ता की अंपायरिंग से ही होता था। वे हृदय रोग से भी पीड़ित थे।
Umpire Manik Gupta का करियर
माणिक गुप्ता जिला स्तर के बेहतर क्रिकेटर थे। वे कानपूर जिले में बेस्ट प्लेयर के रूप में जाने जाते थे। बाद में उन्होंने अंपायरिंग की परीक्षा पास की और कानपूर क्रिकेट एसोसिएशन के पैनल में शामिल हो गए। वे लगभग 30 वर्षों से KCA से जुड़े हुए थे। वे टूर्नामेंटों और लीग मैचों की अंपायरिंग करते थे। वे जिला स्तर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश राज्य स्तर के पैनल अंपायर भी थे।
अंपायर माणिक गुप्ता की खासियत
अंपायर माणिक गुप्ता निष्पक्ष और सही फैसले लेते थे। वे अंपायर की ड्रेस पहनकर बहुत खुश होते थे। गुप्ता क्रिकेट में सच्चाई और ईमानदारी पर जोर देते थे। उनके पड़ोसी भारतेन्दु पूरी ने मीडिया को बताया ,” माणिक गुप्ता ने अपना पूरा जीवन अंपायरिंग में समर्पित कर दिया था। वे क्रिकेट के प्रति संपूर्ण रूप से समर्पित थे। वे अंपायरिंग से अपने परिवार का पालन पौषण करते थे। “साथी जगदीश शर्मा ने भी उनकी उम्र के कारण तेज न भाग पाने के बात कही है। वे कानपूर क्रिकेट सर्किट में एक सम्मानित अंपायर के रूप में जाने जाते थे।





