Shivani Mehrotra hoisted the Tricolour on Mount Elbrus.

Shivani Mehrotra: सीतापुर की शिवानी मेहरोत्रा ने माउंट एल्ब्रुस किया फतह, फहराया तिरंगा

Shivani Mehrotra : उत्तर प्रदेश के सीतापुर की बेटी 43 वर्षीय शिवानी मेहरोत्रा ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रूस स्थित यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर भारतीय तिरंगा फहराया।

Shivani Mehrotra ने Mount Elbrus किया फतह

शिवानी मूल रूप से सीतापुर की रहने वाली हैं। वहां सेक्रेड हार्ट इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज से पढ़ाई की। 1984 में जन्मीं शिवानी की शादी 2005 में सौरभ मेहरोत्रा से हुई। अब वह परिवार के साथ मुंबई में बस गई हैं। 18 साल की बेटी की परवरिश, घर की जिम्मेदारियां और योग प्रशिक्षक का पेशा संभालते हुए उन्होंने पर्वतारोहण का जुनून कभी नहीं छोड़ा।

उन्होंने खुद कहा, “उम्र सिर्फ एक नंबर है। असली ताकत लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और अनुशासन में होती है।” परिवार, माता-पिता संजय और आरती मेहरोत्रा, पति, बेटी और दोस्त,हमेशा उनका हौसला बढ़ाते रहे।

Shivani Mehrotra का पर्वतों का सफर कैसे शुरू हुआ ?

2019 में सबसे अच्छी दोस्त के साथ माउंट एवरेस्ट बेस कैंप की ट्रेक से सफर शुरू हुआ। फिर कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल के पहाड़। फ्रेंडशिप पीक और जनवरी 2026 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (5,895 मीटर) भी फतह कर चुकी हैं। कैलाश से जुड़े चार प्रमुख ट्रेक पूरे कर चुकी हैं। अब लक्ष्य सेवन समिट्स पूरा करना और माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा लहराना है।

Shivani Mehrotra ने एल्ब्रुस चोटी पर की चढ़ाई

8 अगस्त को मुंबई से रवाना हुईं। दुबई होते हुए रूस के मिनरल्नी वोडी पहुंचीं। चतुर टूर्स कंपनी के 10 दिन के अभियान में मौसम के लिए बफर दिन भी रखा गया था। तेज बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और कम ऑक्सीजन के बीच अक्लाइमेटाइजेशन के लिए 3,000, 4,000 और 4,700 मीटर तक चढ़ाइयां कीं।

शिखर दिवस पर रात 2 बजे चढ़ाई शुरू हुई। अंधेरा, तेज हवाएं, भारी सामान और कम ऑक्सीजन। शिवानी मेहरोत्रा खुद को दोहराती रहीं “रुकना नहीं है, चलते रहना है।” करीब साढ़े चार घंटे बाद शिखर पर पहुंचीं। वहां घुटनों के बल बैठकर पहाड़, दोस्तों और आस्था को धन्यवाद दिया।

Shivani Mehrotra की फिटनेस और परिवार का संतुलन

योग प्रशिक्षक और अल्ट्रा-रनर शिवानी रोज सुबह 3:30 बजे उठकर योग, जिम, रनिंग और ट्रेक की तैयारी करती हैं। कोविड के दौरान योग में गहराई से जुड़ीं और अब प्रेग्नेंसी, पोस्ट-नेटल और कैंसर मरीजों के लिए भी क्लास लेती हैं। अभियानों का खर्च ज्यादातर अपनी बचत से उठाती हैं।

माउंट एल्ब्रुस सेवन समिट्स में शामिल है। शिवानी की यह सफलता सिर्फ एक चोटी फतह करने की नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों के बीच सपनों को जिंदा रखने की कहानी है। सीतापुर में गर्व का माहौल है। अगला लक्ष्य एवरेस्ट है। शिवानी साफ कहती हैं—“अगर मन में ठान लिया है तो उम्र या परिस्थितियां आड़े नहीं आ सकतीं। बस फोकस रखना है।”

यह उपलब्धि महिलाओं, खासकर 40 पार उम्र की महिलाओं को पहाड़ों पर आने की प्रेरणा दे रही है। शिवानी मेहरोत्रा साबित कर रही हैं कि घर, परिवार और ऊंचे सपने साथ-साथ चल सकते हैं।

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