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Bulli Bai App Case: Mumbai Court ने Vishal Jha को किया बरी

Bulli Bai App Case: Mumbai Court ने Vishal Jha को किया बरी

Bulli Bai App Case में मुंबई की बांद्रा अदालत ने आरोपी Vishal Jha को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जानें कोर्ट का पूरा फैसला और क्या कहा गया।

Bulli Bai App Case: Mumbai Court Acquits Vishal Jha

मुंबई की बांद्रा अदालत ने मंगलवार को बुल्ली बाई ऐप मामले में आरोपी विशाल सुधीरकुमार झा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। यह इस मामले में पहला डिस्चार्ज ऑर्डर है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आरटी इंगले ने फैसला सुनाते हुए साफ कहा कि सिर्फ ऐप को फॉलो करना या सह-आरोपियों से संपर्क में रहना कोई अपराध नहीं है।

Vishal Jha को मुंबई पुलिस के साइबर सेल ने गिरफ्तार किया

विशाल झा, जो उस समय बेंगलुरु में इंजीनियरिंग के छात्र थे, जनवरी 2022 में मुंबई पुलिस के साइबर सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए थे। वे इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले व्यक्ति थे। आरोप था कि उन्होंने बुल्ली बाई ऐप के निर्माण या प्रसार में भूमिका निभाई। इस ऐप पर 100 से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें आपत्तिजनक टिप्पणियों के साथ ऑनलाइन नीलामी के रूप में डाली गई थीं। ऐप GitHub प्लेटफॉर्म पर लॉन्च हुआ था।

Vishal Jha के खिलाफ ठोस सबूत नहीं

कोर्ट ने चार्जशीट की बारीकी से जांच की। अदालत ने पाया कि विशाल झा के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है कि उन्होंने ऐप बनाया, बनाने में मदद की या मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें साझा कीं। जज ने कहा, “शायद आवेदक ने सह-आरोपियों से परिचित होने और संपर्क के कारण बुल्ली बाई ऐप को फॉलो किया हो, लेकिन पूरी चार्जशीट में उनकी कोई और भूमिका नहीं दिखती जो यह साबित करे कि उन्होंने ऐप बनाया या बनाने में मदद की।”

Vishal Jha को अदालत ने किया आरोप मुक्त

अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि वेबसाइट के किसी पेज को सिर्फ फॉलो करना अपराध नहीं है। इसी आधार पर विशाल झा को IPC की धारा 153(ए), 153(बी), 295(ए), 354(डी), 509, 500, 120(बी), 201 और आईटी एक्ट की धारा 67 के आरोपों से मुक्त कर दिया गया।

यह याद दिला दें कि 2022 में इस मामले में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। विशाल झा समेत तीन आरोपियों को पहले जमानत मिल चुकी थी। बाकी आरोपियों का मुकदमा अभी भी चल रहा है।

इस फैसले से एक बार फिर साफ हुआ कि साइबर क्राइम के मामलों में भी अदालत सबूतों पर ही फैसला करती है। सिर्फ संपर्क या फॉलो करने से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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