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दिल्ली हाईकोर्ट ने पिंजरा तोड़ एक्टिविस्ट देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और जामिया के छात्र आसिफ इकबाल को दी जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने पिंजरा तोड़ एक्टिविस्ट देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और जामिया के छात्र आसिफ इकबाल को दी जमानत

नताशा नरवाल को पिछले साल मई महीने में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर आरोप है कि एनआरसी/सीएए के आंदोलन के दौरान गत वर्ष फरवरी महीने में होने वाले दंगों के पीछे की साजिश में वह शामिल थी। आज 15 जून को दिल्ली हाईकोर्ट ने नताशा अग्रवाल सहित 3 को जमानत दे दी है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा मामले में गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार पिंजरा तोड़ कार्यकर्ता देवांगना कलिता और नताशा निरवाल और जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इक़बाल तन्हा को जमानत दे दी है ।

एक्टिविस्ट नताशा नरवाल को मिली जमानत 

दिल्ली हाईकोर्ट ने तीनों को 50000 रूपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि तीनों अपना पासपोर्ट सरेंडर करेंगे। ऐसी किसी भी गैर कानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे, जिससे जांच किसी भी तरह से प्रभावित हो।

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस ए जे भंभानी की पीठ ने इन तीनों की जमानत याचिका पर 18 मार्च को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था । आसिफ ने एक निचली अदालत के 26 अक्टूबर 2020 के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने इस आधार पर जमानत याचिका खारिज कर दी थी कि आरोपी ने पूरी साजिश में कथित रूप से सक्रिय भूमिका निभाई थी और इन आरोपों को स्वीकार करने के लिए पर्याप्त आधार है कि आरोप प्रथम दृष्टया सच प्रतीत होते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 जून को आसिफ इक़बाल तन्हा को 13 से 26 जून तक 2 सप्ताह के लिए हिरासत में अंतरिम जमानत दी। ताकि वह 15 जून से होने वाली परीक्षाओं के मद्देनजर पढ़ाई करने और परीक्षा में शामिल होने के लिए यहां एक होटल में रह सके। दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत याचिका का विरोध किया गया था और वकील द्वारा दलील दी गई थी कि दंगे पूर्व नियोजित थे। एक साजिश रची गई थी। जिसमें आसिफ तन्हा भी शामिल था।

बता दें कि 24 फरवरी 2020 को उत्तर पूर्वी दिल्ली में सी ए ए के समर्थक और विरोधियों के बीच हिंसा भड़क गई थी। जिसने सांप्रदायिक रूप ले लिया था। इस हिंसा में कम से कम 54 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 200 लोगों को चोटें आई थी।

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