Dilip Gavit ने Asian Para Games 2026 में 100 मीटर T47 का स्वर्ण जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद यह उनकी एक और बड़ी जीत है। पढ़ें पूरी कहानी।
Dilip Gavit Asian Para Games 2026 champion
दिलीप गावित ने एक बार फिर तिरंगे को ऊंचा कर दिया है। भारत के इस पैरा एथलीट ने जापान के नागोया में हो रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। कुछ ही महीने पहले उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भी इसी स्पर्धा में सोना जीता था। यानी इस साल दो बड़े मंचों पर दिलीप गावित सबसे तेज साबित हुए हैं।
नागोया की ट्रैक पर क्या हुआ?
एशियन पैरा गेम्स का आयोजन 18 से 24 अक्टूबर 2026 तक जापान के आइची-नागोया में हो रहा है। 100 मीटर T47 की हीट में दिलीप ने 11.00 सेकंड का समय निकालकर पहले स्थान के साथ फाइनल में जगह बनाई थी। फाइनल में उन्होंने [फाइनल का समय] सेकंड में दौड़ पूरी की और चैंपियन बने। इस जीत ने दिखा दिया कि कॉमनवेल्थ का स्वर्ण कोई इत्तेफाक नहीं था।
T47 कैटेगरी क्या होती है?
T47 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनकी एक बांह में कमी या अक्षमता होती है। ऐसे में दौड़ते समय शरीर का संतुलन और गति तालमेल बनाना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। इसी चुनौती के बीच 100 मीटर जैसी तेज स्पर्धा जीतना और भी बड़ी बात है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में रिकॉर्ड के साथ सोना
इसी साल जुलाई में ग्लासगो में दिलीप ने 100 मीटर T47 फाइनल 10.71 सेकंड में जीता और गेम्स रिकॉर्ड बनाया। वे कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पैरा ट्रैक एथलीट बने। उसी दौड़ में मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के साथ रजत जीता और भारत को एक-दो का शानदार फिनिश मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी उन्हें बधाई दी थी।
दिलचस्प बात यह है कि दिलीप मूल रूप से 400 मीटर के धावक हैं। ग्लासगो में 400 मीटर स्पर्धा नहीं थी, इसलिए उन्होंने खेलों से करीब दो महीने पहले ही 100 मीटर पर ध्यान लगाया। वह फैसला सही साबित हुआ।
गांव की कच्ची सड़कों से अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक
दिलीप का जन्म 21 अप्रैल 2003 को महाराष्ट्र के नासिक के पास तोरण डोंगरी गांव में हुआ। बचपन में हुए एक हादसे में उन्होंने अपना हाथ खो दिया, लेकिन दौड़ने का जुनून नहीं छोड़ा। वे गांव की धूल भरी सड़कों पर अभ्यास करते थे। वहीं उन्हें कोच वैजनाथ काले ने देखा और पेशेवर पैरा एथलेटिक्स की राह दिखाई। कोच ने उनकी रोजमर्रा की जरूरतों का भी ध्यान रखा।
उनकी बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में आई, जहां उन्होंने 400 मीटर T47 का स्वर्ण जीता। वह पदक भारत का 100वां पदक भी था। पेरिस पैरालंपिक 2024 में वे 400 मीटर T47 के फाइनल तक पहुंचे और आठवें स्थान पर रहे। वह नतीजा उनके लिए निराशाजनक था, पर उन्होंने उसे सीख बनाया और दो साल के भीतर और मजबूत होकर लौटे।
गुरु को समर्पित जीत
ग्लासगो की जीत के बाद दिलीप ने अपना पदक कोच वैजनाथ काले को समर्पित किया था, क्योंकि उस दिन गुरु पूर्णिमा थी। उन्होंने कहा था कि एशियन पैरा गेम्स में वे 100 और 400 दोनों मीटर में स्वर्ण जीतना चाहते हैं और भारतीय ध्वज को ऊंचा फहराना चाहते हैं। 100 मीटर का सोना उस वादे की पहली कड़ी बन चुका है। अब सबकी नजर 400 मीटर T47 पर है।
दिलीप गावित की उपलब्धियां एक नजर में
- एशियन पैरा गेम्स 2026 नागोया: 100 मीटर T47, स्वर्ण पदक
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 ग्लासगो: 100 मीटर T47, स्वर्ण (10.71 सेकंड, गेम्स रिकॉर्ड)
- एशियन पैरा गेम्स हांगझोउ: 400 मीटर T47, गोल्ड मेडल
- पेरिस पैरालंपिक 2024: 400 मीटर T47 फाइनल में आठवां स्थान
दिलीप की उम्र अभी महज 23 साल है और उनके सामने लंबा करियर है। 400 मीटर में एक और स्वर्ण की उम्मीद के साथ वे अब 2028 के लॉस एंजेलिस पैरालंपिक की ओर भी देख रहे हैं। देश के लाखों युवाओं के लिए उनकी कहानी बताती है कि हालात कितने भी कठिन हों, मेहनत और भरोसे से रास्ता बन ही जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गावित ने एशियन पैरा गेम्स में कौन सा पदक जीता?
उन्होंने पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।
क्या दिलीप गावित ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड जीता है?
हां, ग्लासगो 2026 में उन्होंने 10.71 सेकंड के गेम्स रिकॉर्ड के साथ 100 मीटर T47 का स्वर्ण जीता।
T47 कैटेगरी किसके लिए होती है?
यह उन पैरा एथलीटों के लिए है जिनकी एक बांह में कमी या अक्षमता होती है।
दिलीप गावित के कोच कौन हैं?
उनके कोच वैजनाथ काले हैं, जिन्होंने उन्हें गांव से निकालकर पेशेवर पैरा एथलेटिक्स तक पहुंचाया।

