Donation theft at Siddhivinayak Temple

Siddhivinayak Temple में भी चंदा चोरी, अयोध्या के बाद दूसरा बड़ा मामला

Siddhivinayak Temple Donation theft Case:  अयोध्या के बाद मुंबई सिद्धिविनायक मंदिर में भी चढ़ावा चोरी का मामला: 18 करोड़ सालाना हेराफेरी का आरोप, 9 गिरफ्तार, ऑडिट का आदेश दिया गया।

Siddhivinayak Temple Donation theft Case

मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर (Siddhivinayak Temple Mumbai) में श्रद्धालुओं के चढ़ावे यानी दानपेटी से चोरी का मामला सामने आया है। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ayodhya Ram Mandir donation theft) विवाद के ठीक बाद यह घटना महाराष्ट्र में बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुकी है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि मंदिर की दानपेटी से हर साल करीब 18 करोड़ रुपये की हेराफेरी हो रही थी। ट्रस्ट ने खुद लोच स्वीकार की है, 46 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है और नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। राज्य सरकार ने पिछले पांच साल के हिसाब-किताब का ऑडिट कराने का आदेश दिया है।

Siddhivinayak Temple में कैसे शुरू हुई चोरी ?

मार्च 2026 में मंदिर प्रशासन ने दानपेटी में नकदी की कमी महसूस की। दादर पुलिस ने शुरू में 10 हजार रुपये की चोरी का FIR दर्ज किया। सीसीटीवी फुटेज की जांच में पता चला कि कुछ कर्मचारी बार-बार छोटी दानपेटी से पैसे निकाल रहे थे। एक खास धातु के औजार या हाथ से ही सीलबंद पेटी से नकदी निकाली जा रही थी।

मुख्य आरोपी राजेंद्र पेंडुरकर (जो 2009 से मंदिर में काम कर रहे थे) सहित आठ-नौ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने करीब 80 हजार रुपये बरामद किए। सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं।

सिद्धिविनायक मंदिर में कितना दान आता है ?

ट्रस्ट के अनुसार, चोरी पकड़े जाने से पहले साप्ताहिक दान संग्रह करीब 45-50 लाख रुपये था। गिरफ्तारियों और सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने के बाद यह बढ़कर 90-98 लाख रुपये साप्ताहिक हो गया। कुछ रिपोर्टों में तीन हफ्तों में 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंचने का जिक्र है। इसी आधार पर सालाना करीब 18 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया।

ट्रस्ट चेयरमैन सदानंद (सदा) सरवनकर और ट्रस्टी राहुल लोंढे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि दान संग्रह प्रणाली में खामियां थीं। वीआईपी दर्शन के नाम पर पैसे लेने वाले दलाल और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई। Google Pay जैसी सुविधाओं के जरिए अवैध लेन-देन रोक दिया गया।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी से समानता

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। वहां दानपेटी से नकदी और कीमती सामान की चोरी के आरोप में एसआईटी जांच के बाद आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। लगभग 80 लाख रुपये बरामद हुए। सीसीटीवी फुटेज में बार-बार चोरी के सबूत मिले।

ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया। राज ठाकरे ने सिद्धिविनायक मामले को अयोध्या से जोड़ते हुए कहा कि मंदिरों में भी भ्रष्टाचार हो रहा है और युवाओं का विश्वास टूट रहा है। उन्होंने ट्रस्टियों के पत्र का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि वरिष्ठ स्तर पर भी संदेह है।

राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप

यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में गरमा गया। राज ठाकरे ने 1-2 अगस्त 2026 को एमएनएस छात्र संगठन के कार्यक्रम में ट्रस्टियों का पत्र पढ़कर सुनाया, जो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखा गया था। पत्र में स्पष्ट कहा गया था कि कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद दान में असामान्य वृद्धि हुई, जिससे सालाना 18 करोड़ के नुकसान का संदेह है।

ट्रस्ट ने दावा किया कि वे खुद व्हिसलब्लोअर हैं और मई में ही लॉ एंड ज्यूडिशियरी डिपार्टमेंट से ऑडिट की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई आरोपी कर्मचारी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) शासनकाल में नियुक्त किए गए थे। यूबीटी पक्ष ने अभी तक विस्तार से जवाब नहीं दिया।

ट्रस्टियों का इस्तीफा देने से इंकार 

ट्रस्टियों ने इस्तीफा देने से इनकार किया। सरवनकर ने कहा, “हमने घोटाला पकड़ा, इसलिए इस्तीफा क्यों दें?” उन्होंने पिछले वर्षों के आंकड़े दिए: 2022-23 में सालाना दान 106 करोड़, 2023-24 में 114 करोड़ और हालिया बजट अनुमान 182 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ट्रस्ट का कहना है कि सुधारों के कारण आय बढ़ी है।

सरकारी कार्रवाई और आगे की जांच

महाराष्ट्र सरकार के लॉ एंड ज्यूडिशियरी विभाग ने ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अधीन यह विभाग ऑडिट का आदेश दे सकता है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद पिछले पांच साल के खातों का ऑडिट कराने का फैसला लिया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से भी जांच की मांग की गई है। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है, दान गिनने की प्रक्रिया में बदलाव किया है और सीसीटीवी निगरानी सख्त की है।

सिद्धिविनायक मंदिर का महत्व और दान प्रणाली

प्रभादेवी स्थित सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई का सबसे अमीर और व्यस्ततम मंदिरों में से एक है। लाखों श्रद्धालु यहां रोजाना आते हैं। दान बॉक्स, ऑनलाइन दान, पूजा बुकिंग, प्रसाद बिक्री और सोने-चांदी के चढ़ावे से आय होती है। पहले हर बुधवार को दान गिना जाता था और उसी दिन बैंक में जमा कर दिया जाता था। लेकिन खामियों के कारण रिसाव हो रहा था। ट्रस्ट ने अब इन खामियों को बंद करने का दावा किया है।

यह घटना मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। श्रद्धालु अपने विश्वास के साथ पैसे चढ़ाते हैं। जब उसी पैसे की चोरी होती है तो आस्था को ठेस पहुंचती है। अयोध्या और मुंबई दोनों मामलों में सीसीटीवी और आंतरिक ऑडिट की कमी उजागर हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े मंदिरों में डिजिटल ट्रैकिंग, स्वतंत्र ऑडिट और सख्त एसओपी जरूरी हैं।

राजनीतिक दल इस मुद्दे का इस्तेमाल एक-दूसरे पर हमला करने के लिए कर रहे हैं, लेकिन असली जरूरत है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वे किसी कवर-अप में शामिल नहीं हैं और खुद जांच की मांग कर रहे हैं। आगे की जांच से पता चलेगा कि नुकसान कितना वास्तविक था और क्या वरिष्ठ स्तर पर कोई संलिप्तता थी।

श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था ही एकमात्र रास्ता है। सिद्धिविनायक मंदिर दान चोरी (Siddhivinayak Temple donation theft), मुंबई मंदिर चढ़ावा चोरी, अयोध्या के बाद मंदिर घोटाला जैसे मुद्दे अब चर्चा के केंद्र में हैं। उम्मीद है कि जल्द ही पूरी सच्चाई सामने आएगी और मंदिरों में श्रद्धालुओं का विश्वास फिर से मजबूत होगा।

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