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Greta Thunberg ने की CJP आदोंलन की तारीफ, जलवायु कार्यकर्ता ने कही ये बातें

Greta Thunberg CJP Movement India

Greta Thunberg ने भारतीय छात्र आंदोलन CJP Movement को जनता की ताकत का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होने कहा कि छात्र आंदोलन ने हमें गर्व महसूस कराया।

Greta Thunberg ने की कॉकरोचों की तारीफ

जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भारतीय छात्र आंदोलन, विशेष रूप से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले आंदोलन का समर्थन करते हुए इसे ‘जनता की ताकत’ का जीवंत उदाहरण बताया है। यह घटना 26 जुलाई 2026 को लंदन में हुई, जब थनबर्ग स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) यूके द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम और प्रदर्शन में शामिल हुईं।

Greta Thunberg का लंदन में प्रदर्शन

यह प्रदर्शन भारतीय हाई कमीशन के बाहर और ट्रैफलगर स्क्वायर के आसपास आयोजित किया गया था। इसमें भारतीय प्रवासी छात्र, कार्यकर्ता और SFI यूके के सदस्य शामिल थे। प्रदर्शन का उद्देश्य भारत में चल रहे छात्र आंदोलन के साथ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता जताना था। SFI यूके ने थनबर्ग की उपस्थिति को महत्वपूर्ण बताया और सोशल मीडिया पर उनके समर्थन की तस्वीरें तथा वीडियो साझा किए।

Greta Thunberg: भारतीय छात्र आंदोलन ने हम सभी को गर्व महसूस कराया

थनबर्ग ने अपने भाषण में स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारतीय छात्र आंदोलन ने हम सभी को गर्व का एहसास कराया है। उन्होंने हमें आशा दी है। वे दिखाते हैं कि जब लोग एक साथ आते हैं और प्रतिरोध करते हैं तो हम क्या हासिल कर सकते हैं। वे जनता की ताकत का असली मतलब बताते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि भारतीय छात्रों का न्याय के लिए संघर्ष और लोकतंत्र तथा मुक्ति का व्यापक संघर्ष हमारी भी लड़ाई है। इसलिए अब सभी को एक साथ आकर भारत के साथ एकजुटता में उठ खड़ा होना चाहिए।

Greta Thunberg और कॉकरोच आंदोलन

यह समर्थन उस पृष्ठभूमि में आया जब भारत में CJP के नेतृत्व में लगभग 36 दिनों का बड़ा छात्र आंदोलन चल चुका था। यह आंदोलन जून 2020 के आसपास शुरू हुआ था और मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, खासकर नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर था। छात्र पारदर्शिता, जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे। आंदोलन जंतर मंतर पर केंद्रित रहा और जुलाई 20 के आसपास पुलिस कार्रवाई के बाद और तेज हो गया। कई छात्र संगठनों और कार्यकर्ताओं, जिनमें सोनम वांगचुक भी शामिल थे, ने इसका समर्थन किया। वांगचुक ने लंबे समय तक भूख हड़ताल भी रखी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र

आंदोलन की सफलता तब मिली जब केंद्र सरकार ने मांगों को मान लिया। इनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने जैसी बातें शामिल थीं। CJP ने 36 दिनों के आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की। थनबर्ग का बयान इस “जीत” के बाद आया, इसलिए इसे आंदोलन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।

ग्रेटा ने भारतीय आंदोलनों का किया समर्थन 

थनबर्ग की इस भागीदारी ने चर्चा को और बढ़ा दिया है। एक ओर कई लोग इसे युवा आंदोलनों की वैश्विक एकजुटता का उदाहरण मानते हैं। दूसरी ओर कुछ आलोचक इसे राजनीतिक रंग देने या पुरानी किसान आंदोलन वाली रणनीति से जोड़कर देखते हैं। थनबर्ग इससे पहले भी भारत से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रही हैं, लेकिन इस बार उन्होंने जलवायु से हटकर शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक जवाबदेही के मुद्दे पर खुलकर बात की।

कॉकरोच आंदोलन 

CJP नामक युवा समूह ने परीक्षा लीक और शिक्षा प्रणाली की खामियों को लेकर बड़े पैमाने पर छात्रों को संगठित किया। यह आंदोलन मुख्य रूप से वैचारिक नहीं बल्कि व्यावहारिक मुद्दों पर आधारित था—भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली, युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और व्यवस्था में सुधार। लाखों युवाओं की भागीदारी ने इसे हाल के वर्षों का एक महत्वपूर्ण छात्र आंदोलन बना दिया। थनबर्ग ने इसी सामूहिक शक्ति को रेखांकित किया।

SFI का लंदन आंदोलन 

लंदन में थनबर्ग के भाषण के बाद SFI यूके ने इसे “विजय सभा” का रूप दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय छात्र आंदोलन ने वैश्विक कार्यकर्ताओं को जनता की शक्ति के बारे में नई आशा दी है। थनबर्ग की उपस्थिति ने इस स्थानीय प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह दिलाई।

ग्रेटा के समर्थन आंदोलन को नैतिक बल मिला 

यह घटना कई पहलुओं को उजागर करती है। पहला, युवा आंदोलनों की वैश्विक पहुंच अब तेज हो गई है। सोशल मीडिया और प्रवासी संगठनों के माध्यम से स्थानीय मुद्दे अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच जाते हैं। दूसरा, थनबर्ग जैसी हस्तियों का समर्थन आंदोलन को नैतिक बल प्रदान करता है, भले ही वे जलवायु कार्यकर्ता के रूप में जानी जाती हों। तीसरा, भारत में शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का मुद्दा अब सिर्फ घरेलू नहीं रह गया है।

न्याय मुक्ति का संघर्ष

थनबर्ग ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि न्याय, लोकतंत्र और मुक्ति का संघर्ष सीमाओं से परे है। उनके अनुसार भारतीय छात्रों का संघर्ष सभी के लिए प्रेरणा है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे भारत के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाएं। यह बयान उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो परीक्षा लीक, अनियमितताओं और व्यवस्थागत खामियों से प्रभावित हुए।

CJP अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित

कुल मिलाकर, ग्रेटा थनबर्ग का यह समर्थन CJP-नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करता है। उन्होंने इसे “जनता की ताकत” का उदाहरण बताते हुए युवाओं की एकजुटता और प्रतिरोध की शक्ति को सराहा। यह घटना दिखाती है कि स्थानीय छात्र आंदोलन कैसे वैश्विक ध्यान आकर्षित कर सकते हैं और कैसे अंतरराष्ट्रीय आवाजें स्थानीय संघर्षों को मजबूती प्रदान कर सकती हैं। भारत में परीक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग अब सिर्फ छात्रों की नहीं, बल्कि व्यापक लोकतांत्रिक चर्चा का हिस्सा बन चुकी है।

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