Indus Valley Civilization

सिंधु घाटी की सभ्यता ऐसे हुई थी नष्ट, वैज्ञानिकों का नया शोध

Indus Valley Civilization destroyed: सिंधु घाटी की सभ्यता को हड़प्पा संस्कृति के नाम से भी जाना जाता है। IIT गांधीनगर के वैज्ञानिकों ने सिंधु घाटी की सभ्यता के नष्ट होने के कारणों पर शोध किया है।

सिंधु घाटी की सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization – IVC), जिसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन विश्व की सबसे उन्नत शहरी सभ्यताओं में से एक थी। यह लगभग 5,000 से 3,500 वर्ष पूर्व (लगभग 3300-1900 ईसा पूर्व) वर्तमान पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत के क्षेत्रों में फली-फूली।

Indus Valley Civilization : प्रमुख विशेषताएं

सुनियोजित शहर (जैसे हड़प्पा, मोहनजो-दारो, लोथल, धोलावीरा), उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली, जल निकासी तंत्र, मानकीकृत माप-तौल और व्यापार नेटवर्क। लंबे समय से पुरातत्वविदों और इतिहासकारों को इस सभ्यता के पतन का रहस्य परेशान करता रहा है। क्या यह अचानक बाढ़, युद्ध या प्राकृतिक आपदा से नष्ट हुई? हाल ही में आईआईटी गांधीनगर के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक अध्ययन ने इस रहस्य को सुलझाने का दावा किया है। उनका कहना है कि सभ्यता का पतन अचानक नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों में धीरे-धीरे हुआ, जिसमें मुख्य भूमिका लगातार सूखे की रही।

सिंधु घाटी सभ्यता पर नया शोध

यह अध्ययन 27-29 नवंबर 2025 को प्रकाशित हुआ, जो “Communications Earth & Environment “(नेचर ग्रुप का जर्नल) में छपा। अध्ययन का नेतृत्व आईआईटी गांधीनगर के जलविज्ञानी प्रोफेसर विमल मिश्रा ने किया, जबकि प्रमुख शोधकर्ता हिरेन सोलंकी (पीएचडी छात्र) हैं। सहयोगी संस्थान हैं, एरिजोना विश्वविद्यालय (USA) और कोलोराडो विश्वविद्यालय (USA)। शोधकर्ताओं ने 5,000 से 3,000 वर्ष पूर्व के जलवायु डेटा का विश्लेषण किया। जिसमें गुफाओं के चूना पत्थर की संरचनाएं झीलों के अवसाद और वैश्विक जलवायु मॉडल सिमुलेशन शामिल हैं। इनसे पता चला कि क्षेत्र में मानसून की कमजोरी और तापमान वृद्धि ने सभ्यता को धीरे-धीरे कमजोर किया।

पहले भी हड़प्पा की संस्कृति पर हो चुके शोध

पिछले सिद्धांतों में बाढ़, युद्ध, नदी मार्ग परिवर्तन या सरस्वती नदी के सूखने को सिंधु घाटी की सभ्यता के नष्ट होने का जिम्मेदार ठहराया जाता था, लेकिन यह अध्ययन इनमें से किसी एक घटना को मुख्य कारण नहीं मानता। बल्कि, यह एक लंबी प्रक्रिया को रेखांकित करता है।

Indus Valley Civilization: सिंधु घाटी के पतन की कहानी

शोधकर्ताओं के अनुसार, सभ्यता का पतन एक अचानक आपदा नहीं, बल्कि 1,000 वर्षों से अधिक समय में धीमी प्रक्रिया थी। मुख्य कारण थे चार प्रमुख सूखे , प्रत्येक 85 वर्ष से अधिक लंबा, जो 4,450 से 3,400 वर्ष पूर्व (लगभग 2425-1400 ईसा पूर्व) हुए। इन सूखों ने क्षेत्र के 65-91% हिस्से को प्रभावित किया। जहां मानसून वर्षा 10-20% घटी और तापमान 0.5°C बढ़ा। इससे नदियां सूखीं, मिट्टी बंजर हुई और कृषि उत्पादन गिरा।

Indus Valley Civilization: सिंधु घाटी में सूखा और प्रभाव
  • सिंधु घाटी में पहला सूखा 4,450-4,200  ईस्वी में पड़ा। जिसका प्रभाव 65 प्रतिशत था।
  • दूसरा सूखा 3,800-3,600  में पड़ा। जिसका प्रभाव 80 फीसदी रहा।
  • तीसरा ड्राट 3,533-3,418 में , प्रभाव 91 प्रतिशत।
  • चौथा सूखा : 3,300 के बाद पड़ा।

Indus Valley Civilization का सबसे लंबा सूखा

तीसरा सूखा (1733 ईसा पूर्व के आसपास) 164 वर्ष चला। जिसने हड़प्पा जैसे प्रमुख शहरों को पूरी तरह प्रभावित किया। यह 3,531-3,418 वर्ष पूर्व का था और पुरातात्विक साक्ष्यों से मेल खाता है। जहां बड़े शहर छोड़ दिए गए और लोग छोटी ग्रामीण बस्तियों में बिखर गए।

Indus Valley Civilization: जलवायु परिवर्तन

उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के गर्म होने से ला नीना जैसी स्थिति बनी। जो शुरुआत में वर्षा बढ़ाती थी, लेकिन बाद में सूखा लाई। सर्दियों की वर्षा ने थोड़ी राहत दी, लेकिन 3,300 वर्ष पूर्व उसके बाद भी कमी हो गई।

Indus Valley Civilization में सूखे का प्रभाव

नदियों (इंडस और उसकी सहायक नदियां) का सूखना। झीलों का स्तर गिरना, और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का चरमराना। लोग पूर्व और दक्षिण (गंगा-यमुना दोआब की ओर) की ओर प्रवास करने लगे।

Indus Valley Civilization पर शोधकर्ताओं का दावा

शोधकर्ता हिरेन सोलंकी ने कहा,” हड़प्पा का पतन एकल आपदा से नहीं, बल्कि सदियों लंबे नदी सूखों से हुआ।” विमल मिश्रा ने जोड़ा, “सभ्यता की लचीलापन दिखा, लोग अनुकूलन करते रहे, लेकिन अंततः पर्यावरणीय तनाव ने उन्हें हरा दिया।

Indus Valley Civilization या हड़प्पा संस्कृति का पतन

1,900 ईसा पूर्व के आसपास शहर खाली होने लगे। Indus Valley Civilization के लोग छोटे गांवों में चले गए, व्यापार घटा और सभ्यता ग्रामीण रूप में विलीन हो गई। कोई युद्ध या हिंसा के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले। अध्ययन जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में चेतावनी देता है। आज की तरह, प्राचीन सभ्यता को भी पानी की कमी ने प्रभावित किया। हालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि वैश्विक तापमान वृद्धि से भारतीय मानसून में वर्षा बढ़ सकती है, जो सकारात्मक पहलु है।

Indus Valley Civilization पर पिछले अध्ययनों जैसे आईआईटी खड़गपुर 2018 ने 900 वर्ष लंबे सूखे का जिक्र किया था। लेकिन यह नया शोध अधिक विस्तृत है। यह बाढ़ या आर्य आक्रमण जैसे सिद्धांतों को खारिज करता है, क्योंकि पुरातात्विक साक्ष्य धीमी प्रक्रिया दिखाते हैं।

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