Jitendra Mishra becomes the first CEO of the Ram Mandir Trust: श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अपने इतिहास का सबसे बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया।
ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त कर दिया है। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब मंदिर में दान-चढ़ावे से जुड़े कथित गबन के मामले के बाद ट्रस्ट प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत बनाने में जुटा है।
कैसे हुआ Jitendra Mishra का चयन, कितने आवेदन आए
राम मंदिर CEO पद के लिए यह चयन प्रक्रिया करीब दो महीने तक चली। शुरुआत में 5,585 आवेदन मिले थे, जिनकी दिल्ली-एनसीआर, पुणे और संबलपुर की अलग-अलग टीमों ने बारीकी से जांच की। इसके बाद 16 उम्मीदवारों को फाइनल राउंड के लिए चुना गया और 3 से 6 अगस्त के बीच उनके इंटरव्यू हुए।
रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। कमेटी में लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और उद्योगपति सुरेश हावड़े भी शामिल थे। कमेटी ने 1 सितंबर को तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपा था।
जिसमें पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय और पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्रा के साथ एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी का नाम भी शामिल था। 2 सितंबर की बैठक में ट्रस्ट ने इन नामों पर मंथन के बाद जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगा दी।
कौन हैं एयर मार्शल Jitendra Mishra?
जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में तीन दशक से ज्यादा समय तक सेवाएं दी हैं। वे वेस्टर्न एयर कमांड सहित कई अहम पदों पर तैनात रह चुके हैं और अपनी अनुशासित कार्यशैली, रणनीतिक योजना और ऑपरेशनल मैनेजमेंट के लिए जाने जाते हैं। मंदिर परिसर में रोजाना लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए ट्रस्ट ने उनके रक्षा और प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाने के लिए उन्हें इस अहम पद के लिए चुना है।
CEO के तौर पर Jitendra Mishra को क्या-क्या जिम्मेदारियां मिलेंगी
नए CEO के रूप में जितेंद्र मिश्रा पर कई बड़ी जिम्मेदारियां रहेंगी:
- मंदिर परिसर की समग्र सुरक्षा व्यवस्था और क्राउड मैनेजमेंट की निगरानी
- आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल को दुरुस्त करना
- ट्रस्ट के विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बिठाना और स्टाफ का संचालन
- श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-कतार व्यवस्था और VIP दर्शन प्रोटोकॉल को व्यवस्थित करना
- CCTV सर्विलांस और डिजिटल तकनीक को आधुनिक बनाना
- परिसर के बाकी निर्माण कार्यों, वित्तीय पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के लिए भोजनालय-धर्मशाला जैसी सुविधाओं की समीक्षा
चंदा चोरी विवाद के बाद क्यों अहम है यह नियुक्ति
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर में दान-चढ़ावे से जुड़े गबन के आरोपों को लेकर विशेष जांच टीम (SIT) की जांच चल रही थी। हाल ही में SIT ने अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी थी, जबकि आठ अन्य लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया। इस विवाद के बाद ट्रस्ट पर प्रशासनिक व्यवस्था को और पेशेवर बनाने का दबाव बढ़ गया था, और CEO का पद इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
आगे क्या बदलेगा
अयोध्या अब एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का धार्मिक पर्यटन केंद्र बन चुका है, ऐसे में मंदिर प्रशासन को कॉर्पोरेट और पेशेवर स्तर पर चलाना जरूरी हो गया था। CEO की नियुक्ति से ट्रस्टियों और प्रशासनिक स्टाफ के बीच फैसले लेने की प्रक्रिया अब पहले से तेज और पारदर्शी होने की उम्मीद है। इसके साथ ही ट्रस्ट में सचिव पद पर भी जल्द नियुक्ति हो सकती है, जिसकी आधिकारिक घोषणा जल्द होने की संभावना है।

