M F Husain की 1952 की मशहूर पेंटिंग ‘The Red Girl’ मुंबई के पुंडोले फाइन आर्ट सेल में 65 करोड़ रुपये की हैमर प्राइस पर बिकी। जानें क्यों इतनी महंगी पड़ी यह कलाकृति।
M F Husain की 1952 की मशहूर पेंटिंग The Red Girl 65 करोड़ में नीलाम
मुंबई की आर्ट मार्केट में एक और बड़ा उछाल देखने को मिला है। मशहूर चित्रकार एमएफ हुसैन की 1952 में बनाई गई पेंटिंग ‘द रेड गर्ल’ 24 सितंबर को पुंडोले के फाइन आर्ट सेल में 65 करोड़ रुपये की हैमर प्राइस पर बिक गई। पेंटिंग की यह कीमत अनुमान से कहीं ज्यादा थी। नीलामी से पहले इसकी अनुमानित कीमत सिर्फ 3 से 5 करोड़ रुपये रखी गई थी। यानी यह पेंटिंग अपने ऊपरी अनुमान से करीब 13 गुना ज्यादा कीमत पर बिकी।
The Red Girl की नीलामी
यह नीलामी हैमिल्टन हाउस में हुई। इसमें आधुनिक और समकालीन भारतीय कला की 81 कलाकृतियां शामिल थीं। ‘द रेड गर्ल’ इस सेल की सबसे महंगी कलाकृति साबित हुई। अकेले इसी पेंटिंग ने पूरे सेल की कुल कीमत का करीब एक तिहाई हिस्सा हासिल किया।
The Red Girl पेंटिंग का आकार
पेंटिंग का आकार करीब 48 बाई 24 इंच है। इसमें एक युवा महिला की आकृति लाल रंग में दिखाई गई है। वह अर्धनग्न है, कमर पर चौड़ी कमरबंद और माथे पर टिक्का पहने हुए है। कला विशेषज्ञों के अनुसार यह आकृति प्राचीन भारतीय यक्षी मूर्तियों से प्रेरित लगती है, खासकर मथुरा शैली की। लाल रंग भी उन यक्षी मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाले लाल बलुआ पत्थर की याद दिलाता है।
M F Husain की पेंटिंग की खासियत
कहा जाता है कि हुसैन ने यह पेंटिंग नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में एफएन सूजा के साथ घूमने के बाद बनाई थी। वहां खंडित मूर्तियों को देखकर वे प्रभावित हुए थे। पेंटिंग में आकृति के निचले हिस्से को अधूरा छोड़ना भी उसी प्रभाव का नतीजा माना जाता है।
किताब में है पेंटिंग का जिक्र
यह कलाकृति नई नहीं है। 1955 में एएस पीरभॉय की किताब ‘पेंटिंग्स ऑफ हुसैन’ में इसका जिक्र और चित्र छपा था। इसका संबंध मुंबई के कला संरक्षक इमैनुएल श्लेसिंगर से भी जोड़ा जाता है, जिन्होंने उस समय के कई आधुनिक कलाकारों को समर्थन दिया था।
एम एफ हुसैन की पेंटिंग की सबसे बड़ी नीलामी
हुसैन की यह बिक्री उनके करियर का रिकॉर्ड नहीं है। इससे पहले उनकी एक और पेंटिंग अंतरराष्ट्रीय नीलामी में 13 मिलियन डॉलर से ज्यादा में बिक चुकी है। फिर भी घरेलू बाजार में 65 करोड़ की यह कीमत काफी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
द रेड गर्ल फिर सुर्ख़ियों में
भारतीय आधुनिक कला की मांग अब भी मजबूत है। खासकर हुसैन जैसे दिग्गजों की शुरुआती और दुर्लभ कृतियों के लिए कलेक्टर्स ऊंची कीमत चुकाने को तैयार हैं। ‘द रेड गर्ल’ 74 साल बाद फिर सुर्खियों में आ गई है और भारतीय कला बाजार की ताकत को दोहराती है।

