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Manisha Bhanwala बनीं विश्व चैंपियन, गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास

Manisha Bhanwala बनीं 2026 की विश्व चैंपियन, रचा इतिहास

Manisha Bhanwala ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में 59 किग्रा का स्वर्ण पदक जीता। 0-6 से पिछड़कर एबिगेल नेट को 8-6 से हराया और पहली भारतीय महिला विश्व चैंपियन बनीं।

Manisha Bhanwala कुश्ती में जीता स्वर्ण पदक

मनीषा भनवाला ने वह कर दिखाया, जिसका भारतीय कुश्ती को बरसों से इंतज़ार था। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कजाकिस्तान के अस्ताना में हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 के 59 किलोग्राम फाइनल में उन्होंने अमेरिका की एबिगेल नेट को 8-6 से हराया। इसके साथ वे विश्व चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गईं।

Manisha Bhanwala ने 0-6 ऐसे पलटी बाजी

फाइनल की शुरुआत मनीषा के लिए अच्छी नहीं रही। पैन अमेरिकी चैंपियन नेट ने शुरू में बढ़त बना ली और स्कोर 0-6 तक पहुंच गया। ज़्यादातर लोग इस मोड़ पर मैच हाथ से निकला मान लेते हैं।

मनीषा ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक के बाद एक आक्रामक दांव लगाए, अंक जोड़ते गईं और आखिर में बाजी पलट दी। लगातार अंक बटोरकर उन्होंने 8-6 की बढ़त ली और उसे अंत तक संभाले रखा। विश्व खिताब के लिए इससे रोमांचक वापसी की कल्पना करना मुश्किल है।

भारत की दूसरी पहलवान बनीं

इस जीत का इतिहास में बड़ा महत्व है। विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के लिए अब तक सिर्फ सुशील कुमार ने स्वर्ण जीता था। उन्होंने 2010 में 66 किग्रा वर्ग में यह कमाल किया था।

अब 2026 में मनीषा भनवाला ने उस सूची में अपना नाम जोड़ दिया है। वे इस उपलब्धि वाली पहली भारतीय महिला हैं। इससे पहले अंशु मलिक ही किसी विश्व चैंपियनशिप फाइनल तक पहुंची थीं। उन्होंने 2021 में 57 किग्रा में रजत जीता था।

59 किग्रा में नया सफर

मनीषा पहले 57 किग्रा और 62 किग्रा वर्ग में उतरती रही हैं। इस बार उन्होंने विश्व चैंपियनशिप के लिए 59 किग्रा में उतरने का फैसला किया। यह फैसला सोने जैसा साबित हुआ।

यह उनके लिए अच्छे साल का शिखर भी है। जून में उलानबाटर ओपन में उन्होंने 57 किग्रा का स्वर्ण जीता था। फाइनल में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप की रजत विजेता उत्तर कोरिया की सोन इल-सिम को पिनफॉल से हराया था।

रोहतक की बेटी का संघर्ष

29 साल की मनीषा हरियाणा के रोहतक से हैं। उनकी कहानी में शुरू से ही चैंपियन बनने का सपना नहीं था। पिता ने उन्हें फिटनेस के लिए हॉस्टल भेजा था और कुश्ती वहीं से जिंदगी में आई। बाद में यही खेल उनकी पहचान बन गया।

रास्ता आसान नहीं रहा। 2024 की विश्व चैंपियनशिप में वे कांस्य पदक के मुकाबले में जापान की मिवा मोरिकावा से हार गई थीं। 2025 में उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में 62 किग्रा का स्वर्ण जीता, जो भारत का उस प्रतियोगिता में पहला स्वर्ण था। उसी साल की विश्व चैंपियनशिप में उत्तर कोरिया की किम ओक-जू से क्वार्टर फाइनल में हार मिली। कई बार पदक के करीब आकर लौटना पड़ा, पर मनीषा टिकी रहीं और आज उसका फल मिला।

भारत की झोली में 4 पदक 

अस्ताना में भारतीय महिला पहलवानों का प्रदर्शन शानदार रहा। भारत को कुल चार पदक मिले।

यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं है। यह उन सैकड़ों लड़कियों के लिए भरोसा है, जो गांव के अखाड़ों और हॉस्टलों में पसीना बहा रही हैं। मनीषा ने दिखाया कि स्कोरबोर्ड पर 0-6 दिखे, तब भी मैच खत्म नहीं होता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मनीषा भनवाला ने किसे हराकर विश्व खिताब जीता?
उन्होंने 59 किग्रा फाइनल में अमेरिका की एबिगेल नेट को 8-6 से हराया।

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 कहां हुई?
यह प्रतियोगिता कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में हुई।

विश्व चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान कौन हैं?
मनीषा भनवाला। पुरुषों में यह उपलब्धि सुशील कुमार ने 2010 में हासिल की थी।

मनीषा भनवाला की यह जीत भारतीय कुश्ती के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी। 0-6 से पिछड़कर 8-6 से जीतना हौसले की मिसाल है। अब पूरे देश की निगाहें इस विश्व चैंपियन की अगली चुनौतियों पर रहेंगी।

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