चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठ रहे हैं सवाल ,पूर्व नौकरशाहों ने लिखा राष्ट्रपति को पत्र

पूर्व नौकरशाहों ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर उठाए सवाल। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को लिखा पत्र। नौकरशाहों ने राष्ट्रपति से निष्पक्ष लोकसभा चुनाव सुनिश्चित करने की अपील की है।

भारतीय चुनाव आयोग

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ,66 पूर्व नौकरशाहों ने भारतीय चुनाव आयोग की कार्यशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को पत्र लिखा। उन्होंने कहा,चुनाव आयोग की प्रक्रिया और विश्वसनीयता खतरे में है। पूर्व नौकरशाहों ने पत्र में लिखा ,”ईसीआई के कमजोर संचालन ने इस संवैधानिक निकाय की विश्वसनीयता को सर्वकालिक कम कर दिया है।”

निष्पक्षता में कमी

पूर्व नौकरशाहों ने लिखा ,”भारतीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता में कमी आई है जोकि हमारे लोकतंत्र के भविष्य के लिए खतरा है। उम्मीद करते हैं कि स्थिति की गंभीरता को समझा जाए।

पत्र में पूर्व नौकरशाहों ने चुनाव आयोग आचार संहिता के उल्लंघन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। लिखा चुनाव आयोग की निष्पक्षता,दक्षता और स्वतंत्रता से समझौता किया जा रहा है।

लोकतंत्र की नींव

जिससे चुनावी प्रक्रिया की अखंडता खतरे में है और आयोग भारतीय लोकतंत्र की नींव है। हम केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा आदर्श आचार संहिता के दुरूपयोग और अवहेलना पर ध्यान दिलाने के लिए व्यथित हैं।

पत्र की एक कॉपी चुनाव आयोग को भी दी गई। जिसमें माना जाता है कि चुनाव आयोग ने पक्षतापूर्ण तरिके से कार्य किया है। इस सूची में 27 मार्च को भारत के पहले एंटी-सैटेलाइट हथियार (ASAT) के सफल प्रक्षेपण के बारे में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक घोषणा शामिल है।

चुनाव आयोग ने पहले इन दावों को ख़ारिज कर दिया था कि प्रधान मंत्री की घोषणा आचार संहिता का उल्लंघन है।

अपने पांच पन्नों के पत्र में पूर्व नौकरशाहों ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक पर भी सवाल उठाया है। पूछा गया लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दिन रिलीज़ हो रही फिल्म पर चुनाव आयोग ने आपत्ति क्यों नहीं जताई।

मोदी की सेना

राजनीतिक भाषणों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की ‘मोदी की सेना’ की टिप्पणी गैर जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा चुनाव आयोग को ऐसे भाषणों पर सख्त करवाई करनी चाहिए।

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