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UGC Bill क्या है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

UGC Bill

UGC Bill पर Supreme Court ने रोक लगा दी है। Chief Justice Surya Kant और Justice Joymalya Bagchi की बेंच ने कहा कि यूजीसी नियमावली के दुरूपयोग होने का खतरा है। आइए जानते हैं, यूजीसी बिल क्या है।

UGC Bill क्या है ?

वास्तव में यह कोई विधेयक नहीं है, जो संसद में पारित हुआ हो। यह University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 है। इसे यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया था। इस बिल को 23 जनवरी 2026 को अंतिम रूप दिया गया। जिसके बाद बवाल मच गया। यह नियम उच्च शिक्षा संस्थानों (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों) में समानता को बढ़ावा देने और जातीय भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए।

यूजीसी बिल के मुख्य प्रावधान

ये नियम 2012 के पुराने UGC anti-discrimination नियमों की जगह लेने के लिए लाए गए थे। जो Rohith Vemula और Payal Tadvi जैसे मामलों के बाद मजबूत बनाने की मांग थी।

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी बिल पर रोक लगाई

29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने UGC Bill पर पूर्ण रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा :

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने नियमों को फिर से ड्राफ्ट करने को कहा है। फिलहाल 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे। यूजीसी बिल पर अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी।

UGC Bill का कौन विरोध कर रहा है ?

स्वर्ण/जनरल कैटेगरी के छात्र और कई याचिकाकर्ता इस बिल का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा ABVP और NSUI के कुछ हिस्से इस बिल का विरोध कर रहे हैं।

तर्क: UGC Bill के नियम केवल SC/ST/OBC को संरक्षण देते हैं। जनरल कैटेगरी को झूठी शिकायतों से बचाव नहीं। इससे कैंपस में डर का माहौल बनेगा। छात्र-शिक्षक स्वतंत्रता प्रभावित होगी।

UGC Bill का स्वागत कौन कर रहे हैं ?

अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्र इस नियमावली का स्वागत कर रहे हैं। कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी,शशि थरूर और प्रमोद तिवारी ने इस बिल का समर्थन किया है। उन्होंने तर्क दिया कि ये नियम जाति आधारित भेदभाव रोकेंगे। पुराने नियम कमजोर थे। नए नियम सुरक्षा देते हैं और मजबूत हैं। झूठी शिकायतों का दुरूपयोग नहीं होगा, क्योंकि जांच होगी।

यूजीसी बिल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला विरोध करने वालों के लिए बड़ी राहत है। जबकि समर्थन करने वालों के लिए झटका माना जा रहा है। सरकार को अब नियमों को स्पष्ट और संतुलित बनाकर दोबारा लाना होगा।

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