Iran War: अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू किया था। इसमें अमेरिका को सैन्य नुकसान, भारी आर्थिक बोझ और घरेलू विरोध का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन ट्रंप इसे फिर भी जीत बता रहे हैं।
अमेरिका-इजराइल और Iran War
28 फरवरी 2026 को अमेरिका ने Operation Epic Pury और इजराइल ने Roaring Lion के तहत ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए थे। इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या, परमाणु साइट्स, मिसाइल लांचर, नौसेना और एयर डिफेंस शामिल थे। ट्रंप ने इसे Pre-emptive attack बताया था।
Iran War: ईरान का जवाब
ईरान ने Operation True Promise 4 के तहत 1000 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन इजराइल और अमेरिका के एयरबेस पर दागे। Strait Of Hormuz को आंशिक समय के लिए बंद कर दिया गया। जिससे कच्चे तेल और एलपीजी का निर्यात रुक गया। हुती विद्रोहियों ने भी अब युद्ध में शामिल होकर इजराइल पर मिसाइलें दागी।
दोनों तरफ से अब तक के हमले
अमेरिका और इजराइल ने ईरान के 11000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए। ईरान की नौसेना,एयरफोर्स को भारी नुकसान हुआ। लेकिन ईरान ने भी गल्फ देशों में अमेरिकी एयरबेस और इजराइल को उम्मीद से अधिक नुकसान पहुंचाया।
ट्रंप का लक्ष्य अधूरा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरू में शासन बदलाव और परमाणु खत्म करने का लक्ष्य बताया। लेकिन अभी तक कुछ लक्ष्य अधूरे हैं। वे 15 पॉइंट पीस प्लान की बात कर रहे हैं और डेडलाइन बढ़ा चुके हैं। लेकिन ईरान ने इसे खारिज कर अपनी 5 शर्ते रखी हैं। ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान के साथ युद्ध विराम पर अच्छी बातचीत चल रही है। जबकि ईरान ने ट्रंप की इन बातों को खारिज किया है। ईरान कहता है कि वो अपनी मर्जी से युद्ध विराम नहीं करेगा और हमलों में हुए नुक्सान का मुआवजा/बदला लेगा।
Iran War में अमेरिका को नुक्सान
सैन्य नुक्सान : अमेरिका के 15 सैनिक मारे गए हैं। 313 घायल हो गए हैं। अमेरिका की 17 मिडिल ईस्ट बेस/साइट्स को नुकसान हुआ। सैन्य क्षेत्र में अमेरिका को लगभग 800 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। यूएस का एक F-35 क्रैश हुआ।
आर्थिक नुक्सान: तेल की कीमतें 114 बैरल प्रति डॉलर तक पहुंच गई, गैसोलीन महंगा हुआ और वैश्विक मुद्रास्फीति का खतरा मंडरा रहा है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज अभी भी ईरान के नियंत्रण में है। हालांकि,पिछले इराक/अफगानिस्तान की तुलना में अमेरिका को पहले से कम नुकसान हुआ है। लेकिन पिछले एक महीने में यह काफी है। कुछ युद्ध विश्लेषक बता रहे हैं कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान की जवाबी क्षमता को कम करके आँका था।
ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे अमेरिकी
28-29 मार्च को पुरे अमेरिका में विरोध प्रदर्शन हुए। न्यूयॉर्क, शिकागो और लॉस अंजोलिस सहित देश के काफी इलाकों में अमेरिकी नागरिकों ने ट्रंप के खिलाफ “No Kings” और “Trump Must Go Now” के नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने ईरान युद्ध, महंगाई ,इमिग्रेशन पालिसी और तेल कीमतों के मुद्दे उठाए।
Iran War की वर्तमान स्थिति
युद्ध जारी है। ट्रंप इसे खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं या यूँ कहें वे ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़कर बुरे फंस गए लगते हैं। क्योंकि ईरान युद्ध विराम के लिए राजी नहीं हो रहा है ऊपर से हुतियों ने भी ईरान के समर्थन में हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका में खुद के राष्ट्रपति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ ब्रूस स्प्रिंगस्टीन जैसे बड़े सेलेब्रिटी भी प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। सऊदी, मिस्र और तुर्की आज बैठक कर रहे हैं। 2500 अमेरिकी मरीन्स पहुंच चुके हैं। ईरान में 3000 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। ईरान ने भी अमेरिका के 500 से अधिक सैनिकों को मारने/घायल करने का दावा किया है।
ट्रंप युद्ध करके फंस गए ?
डॉनल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करके फंस गए लग रहा है। क्योंकि घरेलू विरोध बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। ट्रंप जीत का दावा करते हुए भी पीछे हटने की तैयारी में हैं। ईरानी मीडिया इसे अमेरिका की हार बता रहा है। जबकि अमेरिकी मीडिया मिश्रित रिपोर्ट कर रहा है। इस युद्ध में न जीत हुई न हार हुई और न ही युद्ध विराम हुआ।

