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SEM Court से अभिजीत दिपके को मिली जमानत

SEM Court से अभिजीत दिपके को मिली जमानत

SEM Court ने CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत दी। पीस बॉन्ड भरने के बाद रिहाई। ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से पहले हुई थी हिरासत।

अभिजीत दिपके को SEM Court से जमानत

दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत दे दी है। उन्हें पीस बॉन्ड भरने के बाद रिहा किया जाएगा।

लहरा दो तिरंगा प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था

अभिजीत दिपके को शुक्रवार शाम कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत निवारक कार्रवाई की थी। आशंका जताई गई थी कि प्रदर्शन से शांति भंग हो सकती है।

अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत मिली

शनिवार को दिपके को मंदिर मार्ग थाना स्थित SEM कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत देते हुए पीस बॉन्ड (शांति बनाए रखने का बॉन्ड) भरने का निर्देश दिया। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 50 हजार रुपये के मुचलके की शर्त भी लगाई गई है। बॉन्ड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा गया।

SEM कोर्ट की शर्त

यह इस सप्ताह दिपके की दूसरी हिरासत है। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी उन्हें और दो सहयोगियों को निवारक गिरफ्तारी में लिया गया था। तब भी SEM कोर्ट ने एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया था।

रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर रिहाई की पुष्टि की

CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर रिहाई की पुष्टि की। उन्होंने हिरासत की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और कहा था कि तिरंगा लहराने का आह्वान अपराध नहीं हो सकता।

उसी दिन AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था। उन्हें दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सुबह रिहा कर दिया गया।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। दिपके को अब एक साल तक शांति और अच्छा आचरण बनाए रखना होगा। शर्त का उल्लंघन होने पर आगे कार्रवाई हो सकती है।

अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश

यह मामला दिल्ली में राजनीतिक प्रदर्शनों और निवारक हिरासत के मुद्दे को फिर चर्चा में लाया है। CJP के समर्थक इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश बता रहे हैं, जबकि पुलिस सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का तर्क दे रही है।

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