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Asiya Andrabi को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई

Asiya Andrabi sentenced to life imprisonment

Asiya Andrabi sentenced to life imprisonment: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने अलगावादी नेता आसिया अंद्राबी और उनकी दो सहयोगियों को सजा सुनाई है।

Asiya Andrabi case

यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA द्वारा 2018 में दर्ज किया गया था। 64 वर्षीय आसिया अंद्राबी दुख्तरान-ए-मिल्लत नामक महिला संगठन की संस्थापक हैं। जिसे भारत सरकार ने UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। 40 वर्षीय सोफी फहमीदा इस संगठन की प्रेस सचिव थी। 58 वर्षीय नाहिदा नसरीन इस संगठन की महासचिव थी। तीनों को 2018 में कश्मीर से गिरफ्तार किया गया था। वे लगभग पिछले 8 वर्षों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।

Asiya Andrabi के खिलाफ NIA के आरोप

राष्ट्रिय जांच एजेंसी NIA ने आरोप लगाया कि तीनों ने DeM के माध्यम से कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रची। तीनों पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के समर्थन में सोशल मीडिया, भाषण और सभाओं के जरिए प्रचार किया। देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रची।

Asiya Andrabi पर लगी ये धाराएं

आसिया और उनकी सहयोगियों पर UAPA की धाराओं 18 (साजिश रचना ), 38 और 39 (आतंकवादी संगठन से संबंध) तथा IPC की धरा 120 B ,(आपराधिक साजिश ) 121 A (देश के खिलाफ युद्ध की साजिश), 153 A, 153 B (समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाना) और 505 (भड़काऊ ब्यान) के तहत थे। NIA का दावा है कि वे “कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है” प्रचार कर रही थी। वे पाकिस्तान के समर्थक दो-राष्ट्र सिद्धांत पर आधारित गतिविधियां चला रही थीं।

आसिया अंद्राबी और उसकी सहयोगियों पर कोर्ट का फैसला

14 जनवरी 2026 को दिल्ली की NIA कोर्ट के जस्टिस चन्द्र जीत सिंह ने तीनों को दोषी ठहराया था। मुख्य दोष सिद्धता UAPA 18 और 38 के तहत हुई। उन्हें IPC की धाराओं में भी दोषी पाया गया।

आसिया अंद्राबी पर से हटाए गए ये आरोप

उन्हें कोर्ट ने सबसे गंभीर आरोपों में बरी किया। जैसे वास्तव में देश के खिलाफ युद्ध  छेड़ना, आतंक फंडिंग और पूर्ण रूप से आतंकवादी संगठन की सदस्य्ता। अदालत ने माना कि कोई भी प्रत्यक्ष हिंसा या आतंकी घटना नहीं हुई है। बल्कि भाषण, लिखित सामग्री और संगठनात्मक गतिविधियों पर आधारित साजिश साबित हुई।

ये फैसला 286 पेज का था। केस शुरू में पटियाला हाउस कोर्ट में था। बाद में इसे कड़कड़डूमा कोर्ट में स्थान्तरित किया गया। जज सिंह का ट्रांसफर होने के बावजूद उन्होंने ही फैसला सुनाया।

Asiya Andrabi की सजा पर सुनवाई

जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक केस की सुनवाई हुई। सजा ओर बहस चली NIA ने उम्रकैद की मांग की। तर्क दिया गया कि कम सजा देने पर कानून प्रभावशीलता पर सवाल उठेंगे और जनता का विश्वास टूटेगा। NIA ने कहा कि ये महिलाएं आतंकवादी तत्वों के समर्थन में सोशल मीडिया और सभाओं के जरिए देश के खिलाफ युद्ध छेद रही हैं।

बचावपक्ष की दलीलें

डिफेंस ने कहा कि तीनों लगभग 8 साल जेल में बिता चुकी हैं। वे उम्रदराज हैं और बीमार हैं। कोई हिंसा नहीं की गई। वे शिक्षित महिलांए हैं। बचाव पक्ष ने अदालत से न्यूनतम सजा की मांग की। ये बहस 19 मार्च को समाप्त हुई और आज 24 मार्च को फैसला सुनाया गया।

आसिया अंद्राबी कौन है ?

आसिया अंद्राबी कश्मीर में महिलाओं के बीच अलगाववाद की प्रमुख आवाज रही। उनका पति आशिक हुसैन भी पहले आतंकवाद के मामले में उम्रकैद की सजा काट चूका है। DeM को 2019 में बैन किया गया।

तीनों फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। वे सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में भी अपील कर सकती हैं।

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