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Wangchuk admitted: सोनम वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया

Wangchuk admitted to hospital

Wangchuk News; दिल्ली पुलिस 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को उठाकर अस्पताल ले गई। सीजेपी फाउंडर दीपके को हिरासत में लिया। सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और पृष्ठभूमि।

Cockroach Janata Party का जंतर मंतर पर प्रदर्शन

Cockroach Janata Party (CJP) के जंतर मंतर (दिल्ली) पर चल रहे प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को आज सुबह कथिततौर पर जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करवा दिया है।

एक प्रदर्शनकारी के अनुसार, सुबह सुबह लगभग दस पुलिस वाले मेडिकल टीम का बहाना बनाकर जंतर मंतर पहुंचे। उन्होंने लगभग दस पुलिस वालों को भेजा और दावा किया कि वे मेडिकल टीम हैं। हमें पता चल गया कि वे पुलिस वाले हैं क्योंकि वे डॉक्टर जैसे नहीं लग रहे थे और उन्होंने सभी वॉलंटियर्स को एक तरफ हटने के लिए कहा। हमने उनसे इंतज़ार करने का अनुरोध किया, लेकिन अचानक उन्होंने घोषणा की कि हाई कोर्ट का आदेश है कि सोनम सर को ले जाना है। ”

Wangchuk और CJP की मांगें

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल

सोनम वांगचुक (लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद्) 28-29 जून 2026 को इस प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। उन्होंने शिक्षा सुधार और लद्दाख के लंबित मुद्दों (जैसे Sixth Schedule status, पर्यावरण संरक्षण, राज्यhood) दोनों का समर्थन किया। उन्होंने कहा था कि सरकार जवाब नहीं दे रही तो वे “6 हफ्ते या मौत” तक तैयार हैं।

Wangchuk की मेडिकल रिपोर्ट
सीजेपी/Wangchuk का संसद चलो आंदोलन

20 दिनों (लगभग 17-18 जुलाई तक) की हड़ताल पर पहुंचने तक उनकी स्थिति गंभीर थी — वजन काफी कम, कमजोरी, दर्द। चिकित्सकों ने चेतावनी दी कि तीसरे हफ्ते में जोखिम बढ़ जाता है। कई हस्तियां (अरुंधति रॉय, नसीरुद्दीन शाह आदि) उन्हें हड़ताल खत्म करने की अपील कर चुकी थीं, लेकिन वांगचुक दृढ़ थे और 20 जुलाई को संसद मार्च (“Chalo Sansad”) की तैयारी में थे।

सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया

रिपोर्ट के अनुसार, आज सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को धरना प्रदर्शन से उठाकर दिल्ली के किसी अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने तर्क दिया कि सोनम वांगचुक की तबियत बिगड़ने के खतरे को देखते हुए यह कार्रवाई की गई। पहले भी प्रदर्शन स्थल पर सुविधाएं (पानी, सैनिटेशन) कटने के आरोप लगे थे, जिसे पुलिस ने खारिज किया।

यह प्रदर्शन 28 दिन चला। CJP ने 20 जुलाई (मानसून सत्र शुरू) को संसद मार्च की योजना बनाई। विपक्षी नेता, छात्र संगठन, किसान आदि का समर्थन मिला। सरकार की तरफ से कोई बड़ा जवाब नहीं आया, जिससे तनाव बढ़ा।

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