Corruption Perceptions Index 2025 को ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा 10 फरवरी 2026 को जारी किया गया। इस सूचि में भारत 182 देशों में 91वे स्थान पर पहुंच गया।
Corruption Perceptions Index 2025
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) को Transparency International ने मंगलवार के दिन जारी किया। यह 182 देशों और क्षेत्रों को सार्वजनिक क्षेत्र में कथित भ्रष्टाचार के स्तर के आधार पर रैंक करता है। जहां स्कोर 0 (अत्यधिक भ्र्ष्ट) 100 ( बहुत ज्यादा साफ सुथरा) तक होता है। वैश्विक औसत स्कोर 42-43 के आसपास है। जिससे साफ पता चलता है कि दुनिया भर में अभी भी भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या है।
इस वर्ष की रिपोर्ट में मुख्य निष्कर्षों में शामिल है कि कई देशों में भ्रष्टाचार-रोधी प्रयास रुक गए हैं। जवाबदेही की कमी है, जनता में आक्रोश बढ़ रहा है। भ्रष्टाचार पर रोक और सुधार की मांग उठ रही है। पश्चिमी यूरोपीय देश टॉप 10 में हावी हैं। कुल मिलाकर वैश्विक प्रगति धीमी है।
Corruption Perceptions Index 2025 में भारत ने लगाई 5 पायदान की छलांग
भारत ने Corruption Perceptions Index में पांच पायदान की छलांग लगाई है। भारत अब भ्रष्टाचार के मामले में 91वे स्थान पर पहुंच गया है। भारत अभी भी वैश्विक औसत से नीचे है। रिपोर्ट में
भारत जैसे लोकतंत्रों में भ्रष्टाचार को एक सरंचनात्मक समस्या बताया गया है। जो शासन और जवाबदेही और पारदर्शिता को प्रभावित करता है। हाल ही के वर्षों में मामूली सुधार हुए हैं, लेकिन प्रगति धीमी है।
Corruption Perceptions Index 2025: टॉप 10 देशों की सूचि
- डेनमार्क : 90
- फ़िनलैंड : 88
- सिंगापूर : 84
- न्यूजीलैंड : 83
- लग्जमबर्ग : 81
- नार्वे : 81
- स्विट्जरलैंड : 81
- स्वीडन : 80
- नीदरलैंड्स : 79
- जर्मनी :78
यह सूचि दर्शाती है कि टॉप 10 देशों में भ्रष्टाचार का स्तर कम है। जबकि पश्चिमी यूरोप में भ्रष्टाचार का स्तर ज्यादा है।
भ्रष्टाचार पर जवाबदेही की कमी
कुल मिलाकर रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जवाबदेही की कमी और कमजोर संस्थानों के कारण भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। दुनिया भर में जनता सुधार की मांग कर रही है। भारत के लिए सुधार का एक सकारात्मक संदेश है लेकिन अभी लंबा सफर तय करना है।





