Jhandu Kumar won the bronze medal

Jhandu Kumar ने CWG 2026 में कांस्य पदक जीता, भारत का खाता खोला

Jhandu Kumar ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग श्रेणी में कांस्य पदक जीतकर भारत का मेडल खाता खोल दिया।

Jhandu Kumar ने bronze medal जीता

बिहार के नालंदा जिले के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग श्रेणी में कांस्य पदक जीतकर भारत का मेडल खाता खोल दिया। यह उपलब्धि 24 जुलाई 2026 को एसईसी आर्मडिलो वेन्यू में हासिल की गई।

Jhandu Kumar का मामूली अंतर से तय हुआ मेडल

झंडू कुमार लगभग 28-29 वर्ष के हैं और उन्होंने 130.9 अंकों के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। झंडू कुमार ने पहले प्रयास में 181 किलोग्राम और दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाया। तीसरे प्रयास में 196 किलोग्राम का लक्ष्य रखा, जो बर्मिंघम 2022 के गेम्स रिकॉर्ड को तोड़ सकता था, लेकिन वह असफल रहे। फिर भी उनका प्रदर्शन पर्याप्त साबित हुआ। इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने 208 किलोग्राम (132.8 अंक) के साथ जीता। जबकि सिल्वर इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग को 199 किलोग्राम (131.0 अंक) के साथ मिला। झंडू से महज मामूली अंतर पर पदक तय हुआ। उसी श्रेणी में दूसरे भारतीय खिलाड़ी सुधीर छठे स्थान पर रहे।

Jhandu Kumar ने भारत को पहला मेडल दिलाया

कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में मेडल बॉडीवेट गुणांक सूत्र के आधार पर दिए जाते हैं। विभिन्न वजन वर्गों के खिलाड़ी लाइटवेट और हेवीवेट श्रेणियों में एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं। झंडू लगभग 72 किलोग्राम वर्ग में थे। यह भारत का इस संस्करण का पहला मेडल था और पैरा पावरलिफ्टिंग में उनके प्रदर्शन ने दिन-2 को यादगार बना दिया।

Jhandu Kumar कौन हैं ?

झंडू कुमार की कहानी संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। नालंदा के हरनौत गांव के रहने वाले झंडू को चार साल की उम्र में पोलियो हो गया था, जिससे उनके पैर कमजोर हो गए और गतिशीलता प्रभावित हुई। उनके पिता सब्जी बेचते थे। गरीबी के कारण झंडू ने बचपन से परिवार का सहारा बनने के लिए सब्जी बेचना, आलू बेचना और ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। कोविड काल में भी उन्होंने परिवार का गुजारा किया।

2023 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए उन्होंने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया। 2017 में पैरा स्पोर्ट्स में उनका सफर शुरू हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए, खेलो इंडिया पैरा गेम्स में स्वर्ण जीता, एशिया चैंपियनशिप और वर्ल्ड कप में कांस्य पदक हासिल किए। गुजरात के गांधीनगर एनसीओ में प्रशिक्षण और अनुशासन ने उन्हें ऊंचाई दी। वे बिहार से कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंच पर जाने वाले पहले पैरा एथलीट बने।

Jhandu Kumar का पहला अंतराष्ट्रीय मेडल

पदक जीतने के बाद झंडू ने कहा कि वे बहुत खुश हैं, मानो उड़ रहे हों। यह उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय मेडल था और उन्होंने सिर्फ जीतने का लक्ष्य रखा था। उनकी सफलता ने पूरे देश को प्रेरित किया। साथी खिलाड़ी और प्रशंसकों ने जश्न मनाया। यह उपलब्धि साबित करती है कि शारीरिक चुनौती, आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

Jhandu Kumar बने भारत का गौरव 

इस मेडल ने भारत की कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत को सकारात्मक बनाया। अन्य पैरा पावरलिफ्टरों में अशोक कुमार मलिक लाइटवेट में चौथे रहे। झंडू का सफर न सिर्फ खेल जगत बल्कि समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनके संघर्ष से युवा सीख सकते हैं कि हार न मानने वाले ही इतिहास रचते हैं। ग्लासगो की यह कांस्य चमक बिहार और पूरे भारत के लिए गर्व का विषय बन गई है।

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