Lockdown 2020 : आज से 5 साल पहले 24 मार्च 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने COVID 19 महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी।
पीएम मोदी ने 5 साल पहले की थी लॉकडाउन की घोषणा
24 मार्च 2020 को शाम 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोनावायरस महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी। उस समय भारत में कोरोना संक्रमण के सिर्फ 500 केस थे। पीएम मोदी ने 21 दिन का सख्त लॉकडाउन घोषित किया था। यह 25 मार्च 2020 की मध्यरात्रि लागू हुआ था। इससे पहले 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ का अभ्यास भी हुआ था।
यह भारत की यादों में हमेशा रहेगा, एक तरफ एकजुटता और दूसरी तरफ दर्दनाक पलायन। यहां कुछ सबसे यादगार घटाएं :
Lockdown 2020 की ख़ास घटनाएं
- जनता कर्फ्यू : 22 मार्च 2020 को सुबह 7 बजे से रात के ठीक 9 बजे तक। ठीक 5 बजे हर कोई खिड़की, दरवाजे या बालकॉनी पर खड़े होकर ताली बजाने लगा। डॉक्टर्स,पुलिस और हेल्थ वर्कर्स का सम्मान करने के लिए पुरे देश में ” ताली-थाली” का माहौल था।
- दीया जलाना : 5 अप्रैल 2020 को रात 9 बजकर 9 मिनट पर बिजली बंदकर मोमबत्तियां, दीये और टॉर्च जलाए गए। यह फ्रंटलाइन वर्कर्स के प्रति एकजुटता दिखाने और कोरोना से जंग लड़ने के लिए किया गया था।
- प्रवासी मजदूरों का पलायन : घोषणा के तुरंत बाद बस-ट्रेन बंद हो गई। लाखों मजदूर सड़कों पर सैंकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर घर लौटे। मजदूर, बच्चे, बूढ़े और महिलाएं सिर पर सामान रखरकर सड़कों पर पैदल चले। यह 1947 के विभाजन जैसा दृश्य था। सैंकड़ों की मौत भूख, थकान, एक्सीडेंट या पुलिस के लाठीचार्ज से हुई। लॉकडाउन के शुरुआत दिनों का दर्द अविस्मरणीय है।
- लॉकडाउन की न भूली जानें वाली बातें : बॉलकॉनी से गाना-बजाना, ‘ जान है जहान है’ का नारा, पुलिस की सख्ती, धार्मिक जमावड़ों पर पाबंदी और फेज 3 में शराब की दुकानों पर भीड़ आदि।
लॉकडाउन के लाभ
लॉकडाउन ने कुछ सकरात्मक बदलाव भी लाए :
- कोविड कर्व को रोका : संक्रमण की रफ्तार धीमी हुई , केस डबलिंग का समय 3 से बढ़कर 13 दिन हो गया। अनुमानों के अनुसार, पहले फेस में 29 लाख मौतें और 78 हजार मौतें टलीं।
- परिवार मजबूत हुए : घर पर रहने से परिवार का बंधन मजबूत हुआ। हाथ धोने, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की आदत पड़ी। स्वास्थ्य के प्रति ध्यान देने का समय मिला।
- यातायात बंद होने से प्रदूषण की समस्या कम हुई। दिल्ली मुंबई जैसी जगहों की हवा साफ हुई। गंगा-यमुना नदियां साफ़ दिखीं।
लॉकडाउन के नुक्सान
- आर्थिक झटका : अप्रैल-जून 2020 में GDP -23.9 गिर गया। यह इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट थी। निर्माण क्षेत्र -50 % और विनिर्माण क्षेत्र -39 % तक प्रभावित हुआ। लाखों लोगों की नौकरियां चली गई।
- प्रवासी संकट : करोड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए, भूख प्यास से तड़पने लगे। शुरूआती दिनों में राशन और परिवहन की कमी के कारण लोगों को भारी दुःख झेलने पड़े।
- मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा प्रभावित : घर में बंद रहने से तनाव, और आत्महत्या के मामले बढ़े। स्कूल कॉलेज बंद होने से छात्रों की पढ़ाई का नुक्सान अभी तक असर दिखा रहा है।
- आपूर्ति चेन टुटा : जरूरी सामान की कमी, ब्लैक मार्केटिंग, सामान की कीमतें बढ़ीं। जिससे गरीब तबके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
लॉकडाउन का फैसला
कुल मिलाकर लॉकडाउन एक आवश्यक लेकिन दर्दनाक फैसला था। इसने कोरोना संक्रमण पर काबू पाने में मदद की लेकिन गरीबों, मजदूरों, प्राइवेट सेक्टर/जॉब पर गहरा घाव भी छोड़ा। आज भी हम जब उस समय को याद करते हैं तो एक साथ ‘गो कोरोना गो’ ताली बजाने और पैदल चलते मजदूरों का दर्द दोनों याद आए जाते हैं।
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