MPSC Paper Leak: पुणे में हजारों MPSC अभ्यर्थी पेपर लीक के विरोध में सड़कों पर उतरे। कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन को समर्थन दिया। जानिए पूरी खबर और मांगें।
पुणे में MPSC छात्रों का हल्ला बोल, CJP का साथ
पेपर लीक और भर्ती में गड़बड़ियों के आरोपों पर हजारों अभ्यर्थी सड़क पर, आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग तेज।
पुणे की सड़कों पर इन दिनों सिर्फ नारे नहीं गूंज रहे, उन हजारों सपनों की बेचैनी भी सुनाई दे रही है जो सालों की तैयारी के बाद एक पेपर लीक की खबर से हिल गए हैं। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ पुणे में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उतरे। अब इस आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का खुला समर्थन भी मिल गया है।
ओंकारेश्वर चौक से कलेक्टर ऑफिस तक मार्च
पुणे में MPSC उम्मीदवारों ने ओंकारेश्वर मंदिर चौक से जिला कलेक्टर कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन विद्यार्थी आक्रोश मोर्चा के बैनर तले हुआ, जिसमें राज्य भर से हजारों अभ्यर्थी जुटे। मोर्चे में शामिल छात्रों ने आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर कार्यालय में 12 सूत्रीय मांग पत्र भी सौंपा। मौके पर मौजूद एक छात्र ने कहा कि MPSC पर लोग उसकी साख की वजह से भरोसा करते थे, लेकिन कथित पेपर लीक ने हजारों उम्मीदवारों के मन में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
क्या है पूरा मामला
विवाद के केंद्र में MPSC की ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) स्क्रीनिंग परीक्षा है। इस परीक्षा के पेपर लीक की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। आयोग ने बाद में यह भर्ती परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि लीक हुआ पेपर परीक्षा से पहले उम्मीदवारों तक पहुंचा था। जांच में एक MPSC अधिकारी का लैपटॉप भी बरामद किया गया है।
छात्रों का कहना है कि मामला सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक आयोग की अन्य परीक्षाओं में भी मूल्यांकन की गलतियां और अनियमितताएं सामने आई हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें
पुणे के मार्च में अभ्यर्थियों ने ये मुद्दे उठाए:
- MPSC के अध्यक्ष और सचिव का इस्तीफा और उनकी जगह साफ छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति।
- ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा पर उठी आपत्तियों का आठ दिन के भीतर आयोग से स्पष्टीकरण और अनियमितताओं की जांच।
- 2025 की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा और कृषि सेवा परीक्षा के वर्णनात्मक पेपरों के मूल्यांकन में कथित गलतियों की जांच।
- मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करना।
- 25 अक्टूबर 2026 को होने वाली ग्रुप-सी प्रारंभिक परीक्षा पूरी पारदर्शिता से कराना और स्टेनोग्राफर पद को फिर से शुरू करना।
नेताओं का समर्थन
NCP (SP) विधायक रोहित पवार और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम प्रदर्शन में शामिल हुए। रोहित पवार ने कहा कि सरकार को सभी अभ्यर्थियों को बातचीत के लिए बुलाकर उनकी हर मांग सुननी चाहिए। NCP-SP सांसद सुप्रिया सुले भी छात्रों के बीच पहुंचीं।
CJP का एंट्री: समर्थन और डेडलाइन
आउटलुक की रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन को नया मोड़ तब मिला जब कॉकरोच जनता पार्टी ने खुलकर छात्रों का साथ देने की घोषणा की। CJP ने कहा कि उसके सदस्य और संस्थापक अभिजीत दिपके MPSC की ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में छात्रों के साथ आंदोलन में शामिल होंगे। यह घोषणा छत्रपति संभाजीनगर के वालुज इलाके में दिपके के घर पर अभ्यर्थियों के एक समूह से मुलाकात के बाद हुई।
वीडियो संदेश में दिपके ने कहा, हम इस लड़ाई में MPSC अभ्यर्थियों के साथ हैं और शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे तक साथ खड़े रहेंगे। पार्टी ने MPSC अध्यक्ष विवेक भिमनवार और सचिव महेंद्र हरपलकर के इस्तीफे के लिए 24 सितंबर की समयसीमा तय की थी। पार्टी के मुताबिक मांग न मानी गई तो अभ्यर्थियों से संवाद के लिए राज्यव्यापी दौरा किया जाएगा।
बाद में छत्रपति संभाजीनगर में अभ्यर्थियों से बातचीत के दौरान दिपके ने आयोग में सुधार और अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा और छात्रों से अध्यक्ष को हटाने की मांग को लेकर दो मिनट का इंस्टाग्राम वीडियो पोस्ट करने की अपील की।
MPSC अध्यक्ष का पक्ष
MPSC अध्यक्ष विवेक भिमनवार ने इस्तीफे की मांग खारिज कर दी है। उनका कहना है कि ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक उनके पदभार संभालने से पहले हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई उनके खिलाफ सबूत पेश करे तो वे एक पल भी पद पर नहीं रहेंगे।
अब सबकी नजर 25 अक्टूबर की ग्रुप-सी प्रारंभिक परीक्षा पर है। अभ्यर्थियों की सीधी मांग है कि इस बार प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित हो। सरकार और आयोग की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम तय करेंगे कि यह आंदोलन ठंडा पड़ेगा या और तेज होगा।
पेपर लीक का असर सिर्फ एक परीक्षा तक नहीं रहता। यह उन लाखों युवाओं के भरोसे की बात है जो बिना किसी सिफारिश के अपनी मेहनत पर सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं।






