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NCLT ने Subhash Chandra को दिया बड़ा झटका, 5 सदस्यीय बेंच बनाई

NCLT deals a major blow to Subhash Chandra

NCLT deals a major blow to Subhash Chandra: सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में नया मोड़ आ गया है। सुभाष चंद्रा की राहत अटक गई।

Subhash Chandra को NCLT ने दिया झटका

एस्सेल ग्रुप और जी के संस्थापक सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में नया मोड़ आ गया है। करीब 22,000 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले मात्र 6.25-6.5 करोड़ रुपये के रीपेमेंट प्लान को लेकर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में पहले जो राहत जैसी खबर आई थी, वह अब अटकी हुई है।

NCLT ने इस मामले की सुनवाई के लिए पहली बार पांच सदस्यीय विशेष बेंच का गठन किया है। यह बेंच आज (1 सितंबर 2026) सुबह 10:15 बजे सुनवाई करेगी

NCLT: क्या है विवाद ?

सुभाष चंद्रा ने एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के लोन के लिए पर्सनल गारंटी दी थी। इन दावों की कुल राशि करीब 22,006 करोड़ रुपये स्वीकार की गई। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत संपत्ति से सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये चुकाने और प्रक्रिया खर्च के लिए 25 लाख रुपये का प्रस्ताव दिया। लेनदारों में से 80 प्रतिशत से ज्यादा ने वोटिंग में इस प्लान को सपोर्ट किया था।

पहले दो सदस्यीय बेंच में मतभेद हुआ। तीसरे सदस्य ने प्लान का समर्थन किया, लेकिन बाद में बहुमत नहीं बन पाया। इसलिए कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हो सका। अब बड़े बेंच को पूरा मामला नए सिरे से देखना है।

बैंकों का विरोध और आगे की चुनौती

LIC हाउसिंग फाइनेंस, HDFC बैंक, यूनियन बैंक और केनरा बैंक समेत कई लेनदार इस कम रिकवरी वाले प्लान से नाराज हैं। वे इसे IBC के मकसद के खिलाफ बता रहे हैं। कई बैंक NCLAT में भी चुनौती दे चुके हैं। आज NCLT की बड़ी बेंच के साथ-साथ NCLAT में भी सुनवाई होनी है।

सुभाष चंद्रा का पक्ष है कि उन्होंने खुद कर्ज नहीं लिया था। वे सिर्फ गारंटर थे और मूल कंपनियों ने पहले ही हजारों करोड़ चुका दिए हैं। उनके अनुसार विरोधी लेनदारों के दावे भी 22 हजार करोड़ नहीं, बल्कि बहुत कम हैं।

99 प्रतिशत से ज्यादा हेयरकट

यह मामला पर्सनल गारंटी वाले दिवालियापन मामलों में रिकवरी की सीमा और लेनदारों के वोटिंग अधिकार को लेकर बड़ा उदाहरण बन गया है। 99 प्रतिशत से ज्यादा हेयरकट की चर्चा के बाद अब प्रक्रिया फिर से खुली है। पांच सदस्यीय बेंच का गठन NCLT के इतिहास में दुर्लभ है, इसलिए बाजार और कानूनी हलकों में इस पर नजर टिकी हुई है।

आज की सुनवाई के नतीजे तय करेंगे कि सुभाष चंद्रा का यह रीपेमेंट प्लान आगे बढ़ेगा या फिर नया रास्ता खोजना होगा। पूरा मामला अभी भी खुला है और दोनों तरफ से कड़ी लड़ाई चल रही है।

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