Nipah Virus-NiV: निपाह वायरस रिपोर्ट, लक्षण, उपचार

Nipah Virus-NiV: निपाह वायरस रिपोर्ट, लक्षण, उपचार

Nipah Virus-NiV Report: भारत में हाल ही में निपाह वायरस के मामले सामने आए हैं। मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में निपाह के मामले सामने आए हैं। यह एक छोटा लेकिन गंभीर प्रकोप है। जो स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं में फैला है।

Nipah Virus से भारत में कितने मरीजों की मौत और संक्रमण

24 जनवरी की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक Nipah Virus पुष्ट मामलों की संख्या 5 है। ये सभी मामले पश्चिम बंगाल के कोलकाता के आसपास के एक डॉक्टर,एक नर्स और एक स्वास्थय कर्मी और दो अन्य मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।

Nipah Virus से मरने वालों की संख्या

उपलब्ध रिपोर्ट में इन पांच मामलों में किसी भी मरीज की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि एक महिला नर्स की हालत गंभीर बनी हुई है। जबकि पुरुष स्वास्थयकर्मी की स्थिति में सुधार हो रहा है। सभी मरीजों को ICU में रखा गया है। मरीजों को Remdesivir जैसी दवाएं दी जा रही हैं। संपर्क में आए लोगों को क्वारंटाइन और होम आइसोलेशन में रखा गया है। इससे पहले 2001 और 2007 में निपाह वायरस के मामले देखे गए थे, अब 19 साल बाद फिर नए मामले सामने आए हैं।

किन किन राज्यों में फैला है निपाह वायरस ?

स्वास्थय मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल और केरल में संक्रमण के मामले देखे गए हैं। देश के बाकि राज्यों में कोई मामला सामने नहीं आया है।

Nipah Virus के लक्षण
  • शुरूआती लक्षण 🙁 3 से 14 दिनों तक) बुखार ,सिरदर्द ,गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, खांसी, उल्टी आना और साँस लेने में तकलीफ होना।
  • गंभीर चरण : चक्कर आना, नींद , सुस्ती, भ्रम, चेतना में बदलाव, कोमा में जाना और दौरा पड़ना।
  • Incubation period: 4 से 14 दिन तक
  • Survivors में 20% मामलों में neurological sequelae जैसे seizure disorders या personality changes हो सकते हैं।
  • Relapse या delayed encephalitis भी संभव है।
निपाह वायरस का उपचार
  • इसकी कोई स्पेसिफिक दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
  • केवल supportive care: आराम, hydration, सांस की मदद (ventilation अगर जरूरी), neurological complications का इलाज, ICU सपोर्ट।
  • कुछ मामलों में Remdesivir जैसी antiviral दवाओं का उपयोग किया जा रहा है।
  • Case fatality rate: 40%-75% तक

निपाह वायरस की रोकथाम 

  • संक्रमित जानवरों और सूअरों से संपर्क न करें।
  • संक्रमित व्यक्ति से संपर्क न करें।
  • साबुन से हाथ धोएं
  • PPE किट का इस्तेमाल करें।

यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फ़ैल सकता है , इसलिए हेल्थ वर्कर्स को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

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