Prasad Shrikant Purohit Promoted to Rank of Brigadier: भारतीय सेना के कर्नल प्रसाद श्रीकांत को ब्रिगेडियर रैंक के लिए प्रमोशन की मंजूरी दे दी गई है। आर्मी कोर्ट का यह फैसला 10 अप्रैल को सामने आया है।
कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित का हुआ प्रमोशन
भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरहित के प्रमोशन को मंजूरी दे दी है। इससे पहले वे कर्नल पद पर थे। अब ब्रिगेडियर बनने के बाद उनकी सेवा अवधि 31 मार्च 2028 तक बढ़ गई है। ब्रिगेडियर का रिटायरमेंट 56 साल की उम्र में होता।
Prasad Shrikant Purohit को क्यों मिला प्रमोशन ?
2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस की वजह से उनका करियर 17 साल तक प्रभावित रहा। केस लंबा चला, इसलिए सभी प्रमोशन रुक गए। जुलाई 2025 में NIA कोर्ट ने उन्हें बरी किया। इसके बाद सितंबर 2025 में उन्हें कर्नल रैंक पर प्रमोट कर दिया गया। फिर उन्होंने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) में याचिका दायर की कि केस की वजह से उनके प्रमोशन प्रभावित हुए। AFT ने 31 मार्च 2026 को होने वाली रिटायरमेंट पर रोक लगा दी। सुनवाई के बाद अब सेना ने उनके ब्रिगेडियर पद पर प्रमोशन को हरी झंडी दिखा दी।
श्रीकांत पुरोहित की पत्नी का ब्यान
ब्रिगेडियर पद पर प्रमोट होने के बाद कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की पत्नी अपर्णा पुरोहित ने खुशी जताई। अपर्णा ने कहा कि बरी होने के बाद उन्हें पहले कर्नल बनाया गया और अब ब्रिगेडियर पद पर पद्दोन्नति मिली है। पूरा परिवार खुश है।
Prasad Shrikant Purohit का मालेगांव ब्लास्ट केस कनेक्शन
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में ब्लास्ट हुआ था। जिसमें छह लोग मारे गए थे और सैंकड़ों घायल हो गए थे। महाराष्ट्र ATS ने हिंदू आतंकवाद का केस बनाया। लेफिटनेंट श्रीकांत पुरोहित उस समय मिलिट्री इंटेलिजेंस में ऑफिसर पद पर थे। उन्हें मालेगांव ब्लास्ट का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया। उन पर आरोप था कि उन्होंने मालेगांव के लिए RDX उपलब्ध कराया था।
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप
कर्नल पुरोहित पर अभिनव भारत संगठन से जुडी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप था। प्रज्ञा ठाकुर की बाइक भी सबूत के तौर पर पेश की गई। पुरोहित को नवंबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था। वे करीब 9 साल तक जेल में रहे।
प्रसाद श्रीकांत पुरोहित पर NIA का फैसला
मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट ने जुलाई 2025 में कर्नल श्रीकांत पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और 5 अन्य आरोपियों, मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी और अजय राहिरकर व अन्य को पूरी तरह बरी कर दिया। NIA की अदालत ने कहा कि सिर्फ शक सबूत नहीं हो सकता, अभियोजन पक्ष ने ठोस सबूत नहीं दिए। RDX, बाइक और साजिश का कोई पक्का प्रमाण नहीं मिला।




