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Pratiti Bordoloi बनीं एशियन जूनियर चेस चैंपियन, प्रतीति ने 13 साल की उम्र में जीती चैंपियनशिप

Pratiti Bordoloi

Pratiti Bordoloi: भारतीय शतरंज के लिए एक और गौरवशाली पल आया है। महज 13 साल की उम्र में प्रतीति बोरदोलोई ने एशियन जूनियर क्लासिकल चेस चैंपियनशिप 2026 में गर्ल्स सेक्शन का खिताब जीतकर देश का मान बढ़ाया है। मुंबई के ITC मराठा शेरेटन में हुए इस टूर्नामेंट में प्रतीति ने नौ राउंड में 7.5 अंक हासिल कर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।

Pratiti Bordoloi का चैंपियन बनने का सफर

प्रतीति बोरदोलोई ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक के बाद एक मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को मात दी। नौ राउंड की कड़ी टक्कर में उन्होंने 7.5 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया। कजाकिस्तान की मारिया खोल्यावको मात्र आधे अंक से पीछे रहकर दूसरे स्थान पर रहीं और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। भारत की ही निवेदिता वी सी ने 6.5 अंकों के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।

Pratiti Bordoloi को मिले दो सम्मान

इस जीत के साथ Pratiti Bordoloi को गोल्ड मेडल के अलावा दो बड़े सम्मान भी मिले। उन्हें वुमन इंटरनेशनल मास्टर (WIM) की उपाधि दी गई और साथ ही उन्होंने वुमन ग्रैंडमास्टर (WGM) का नॉर्म भी हासिल कर लिया। यह उपलब्धि उनके शतरंज करियर के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।

Pratiti Bordoloi की जीत के साथ भारत का डबल गोल्ड मेडल

यह चैंपियनशिप भारत के लिए दोहरी खुशियां लेकर आई। ओपन सेक्शन में टॉप सीड मयंक चक्रवर्ती ने भी शानदार खेल दिखाते हुए 7.5 अंकों के साथ गोल्ड मेडल जीता और इसी के साथ जीएम नॉर्म भी हासिल किया। रूस के आर्टेम पिंगिन को सिल्वर और भारत के दक्ष गोयल को ब्रॉन्ज मेडल मिला।

गर्ल्स कैटेगिरी में डबल मेडल

इस तरह भारत ने ओपन और गर्ल्स दोनों वर्गों में खिताब जीतकर “गोल्डन डबल” पूरा किया। मेडल टैली में भी भारत का दबदबा साफ नजर आया, कुल छह पदकों में से भारत ने चार पदक अपने नाम किए, जिसमें दो गोल्ड और दो ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। रूस और कजाकिस्तान के हिस्से एक-एक सिल्वर मेडल आया।

Asian Junior Girls Championship 2026 का आयोजन

एशियन जूनियर चेस चैंपियनशिप 2026 का आयोजन Maharashtra Chess Association ने ऑल इंडिया चेस फेडरेशन और एशियन चेस फेडरेशन की ओर से करवाया। समापन समारोह में एशियन चेस फेडरेशन के सचिव हिशाम अल-ताहेर ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

युवा प्रतिभा Pratiti Bordoloi बनी मिसाल

छोटी उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं होता। Pratiti की यह जीत भारत के उभरते युवा शतरंज खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। देश में जिस तरह से बच्चे कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं, वह भारतीय शतरंज के उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर पेश करता है।

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