Puvarti village CRPF camp : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती गांव स्थित सीआरपीएफ कैंप का एक दिल को छू लेने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में गांव के लोग और नवविवाहित दुल्हन सुरक्षाबलों के साथ डांस करते नजर आ रहे हैं।
नवविवाहटी दुल्हन आशीर्वाद लेने सीआरपीएफ कैंप पहुंची
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूवर्ती (Puvarti village) गांव में हाल ही में एक ऐसी घटना घटी, जो नक्सलवाद से जूझते इस क्षेत्र में शांति, विश्वास और एकता की नई मिसाल पेश कर रही है। यह गांव कभी कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव माना जाता था, जहां नक्सलियों का दबदबा इतना था कि कोई भी विवाह या सामाजिक आयोजन उनके बिना पूरा नहीं होता था।
Puvarti village CRPF camp: नवविवाहित दुल्हन का वीडियो वायरल
Puvarti village CRPF camp: यह घटना 24-25 जून 2025 को हुई, जब पूवर्ती गांव की एक स्थानीय आदिवासी युवती की शादी का आयोजन था। शादी के बाद विदाई के समय गांव के लोग नवविवाहित दुल्हन को लेकर सीधे पास स्थित सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के कैंप पहुंचे। यह कैंप जंगल क्षेत्र में है । जो 2024 में सीआरपीएफ की 150वीं बटालियन द्वारा स्थापित किया गया था।
दुल्हन ने जवानों के पैर छूकर लिया आशीर्वाद
Puvarti village CRPF camp: दुल्हन ने जवानों और अधिकारियों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जैसे वे उसके अपने भाई हों। जवानों ने इसे एक पारिवारिक पल मानते हुए दुल्हन को नेग शगुन के रूप में नकद या उपहार दिया। जवानों ने उसके सिर पर हाथ फेरा और आशीर्वाद दिया। फिर, सभी ने मिलकर जश्न मनाया। ग्रामीणों के साथ बस्तरिया बाजे पर नाचे-गाए। दुल्हन भावुक हो गई, जवानों ने उसे परिवार की तरह विदाई दी। यह पूरा दृश्य वीडियो में कैद हो गया। जो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
CRPF जवानों को भाई मानते हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि वे CRPF जवानों को अब “अपने भाई” मानते हैं, क्योंकि कैंप स्थापित होने के बाद गांव में पहली बार मेडिकल कैंप लगे। वहां पंचायत चुनाव हुए (फरवरी 2025 में आजादी के 75 साल बाद पहली वोटिंग), और विकास कार्य तेज हुए। जवानों ने भी कहा कि यह उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है, ड्यूटी के बीच में शादी की खुशी साझा करना।
Puvarti village CRPF camp: हिड़मा का गांव
Puvarti village को नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। जहां हिड़मा जैसे कमांडर का पहला हक होता था। वह चाहे तो डोली आए या जाए। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से नक्सल प्रभाव कम हुआ। हिड़मा की मौत के बाद गांव में शांति आई। अब ग्रामीण खुलकर सुरक्षा बलों के साथ जुड़ रहे हैं। यह घटना उसी बदलाव का प्रतीक है। जहां कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहां अब शहनाई बज रही है।




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