रहस्य-रोमांच से भरपूर फिल्म जैसा रहा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का हटाना

केंद्र को नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का हटाना बॉलीवुड की किसी रहस्य-रोमांच और हॉरर मूवी जैसा रहा। जिसमें,जम्मू-कश्मीर में अचानक सेना और अर्धसैनिक बलों की बढ़ती हुई हलचल को देख कर हर कोई कयास लगा रहा था कि जम्मू-कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है।

लोगों में ये जानने की उत्सुकता तब और बढ़ गई जब अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को एकाएक निर्देश दिया गया कि जितना जल्दी हो सके जम्मू-कश्मीर को छोड़कर चले जाएं।

सेना, वायुसेना और अर्धसैनिक बलों की घाटी में इतनी भारी संख्या में तैनाती को देख कर स्थानीय लोगों ने अपने जीवन यापन के संसाधनों को एकत्रित करना शुरू कर दिया। पेट्रोल पंपों,राशन की दुकानों और एलपीजी गैस दफ्तरों पर लोगों ने भीड़ जमाना शुरू कर दिया। किसी अप्रत्याशित घटना होने की अटकलों के बीच लोगों में एक अलग ही माहौल बना हुआ था।

यह सब जुलाई के अंतिम सप्ताह में तब शुरू हुआ जब केंद्र सरकार ने आतंकवाद विरोधी अभियानों की मजबूती और कानून व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के आधार पर घाटी में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को तैनाती का आदेश दिया।

इसके बाद कश्मीर घाटी में चिंता का माहौल हो गया। कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। शुक्रवार को इस धारा 370 रूपी फिल्म में उस समय और रोमांच बढ़ गया जब सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाने की फिराक में हैं।

इसके बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को घाटी छोड़ने के लिए कहा। कयास लगाए गए की कश्मीर में हो रहे इस घटनाक्रम आतंकी खतरे से जुड़े हैं।वहीँ कुछ लोग और जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियां धारा 370 और 35ए से छेड़छाड़ की संभावना भी जताने लगे।

इसी बीच जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती को उनके घर पर ही नज़रबंद किया गया और गृहमंत्री ने दिल्ली में रॉ,एनएसए और आईबी के चीफ से मीटिंग करने के बाद राज्य सभा में 370 हटाने का प्रस्ताव रखा। जिसको राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जारी करते हुए जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म करने का आदेश पारित किया।

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