Tehelka editor Tarun Tejpal convicted in rape case: तरुण तेजपाल को गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी करार दिया है।
Tehelka editor Tarun Tejpal convicted in rape case
तहलका पत्रिका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने मापुसा सत्र न्यायालय के 2021 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था
Tehelka editor Tarun Tejpal convicted in rape case: मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला 7 नवंबर 2013 को गोवा में आयोजित प्रतिष्ठित THiNK Fest के दौरान शुरू हुआ था। आरोप है कि इस दौरान तेजपाल ने अपनी एक सहकर्मी के साथ होटल की लिफ्ट में यौन उत्पीड़न किया था। पीड़िता तहलका की ही एक सहकर्मी थीं और यह घटना गोवा के एक फाइव-स्टार होटल की लिफ्ट में हुई थी बताई गई।
तेजपाल ने घटना के बाद पीड़िता को औपचारिक और अनौपचारिक माफीनामा भी भेजा था, जिसमें उन्होंने 7 और 8 नवंबर 2013 की घटनाओं के लिए बिना शर्त शर्मिंदगी जताई थी। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने इस माफीनामे को सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं किया था।
2021 में हुआ था बरी
मापुसा की सत्र अदालत ने वर्ष 2021 में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। उस समय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश क्षमा जोशी की अदालत के फैसले ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया था, क्योंकि इसमें पीड़िता के व्यवहार पर सवाल उठाए गए थे और इसे “रेप पीड़िताओं के लिए मैनुअल जैसा” फैसला बताया गया था। गोवा सरकार ने इस बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसे राज्य ने “विकृत” (perverse) आदेश करार दिया था।
हाईकोर्ट का फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने अपने फैसले में तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया है। गोवा पुलिस की पूर्व जांच अधिकारी सुनीता सावंत ने अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट सबूतों का सही आकलन करने में विफल रही थी और हाईकोर्ट ने उचित रूप से बरी किए जाने के फैसले को रद्द किया। गोवा के महाधिवक्ता देवीदास पंगम ने भी इस फैसले की सराहना करते हुए इसे न्याय और सबूतों पर आधारित फैसला बताया।
सजा और आगे की कानूनी प्रक्रिया
सजा की घोषणा दोपहर 2:30 बजे की जाएगी। धारा 376 के तहत न्यूनतम सजा 10 साल की कैद है, जबकि अधिकतम सजा उम्रकैद हो सकती है। तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने कोर्ट से अनुरोध किया कि आदेश को आठ हफ्ते के लिए रोका जाए ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जा सके।





