Moon Mysteries

Moon Mysteries: चांद सिर्फ 5 घंटे में बना? रिसर्च से चौंकाने वाला खुलासा

Moon Mysteries: करोड़ों साल पहले बने चांद के रहस्य पर से आप पर्दा उठ गया। एक शोध के अनुसार चांद का जन्म एक खगोलीय घटना के कारण हुआ था। आइए जानते हैं, चांद के वो रहस्य, जो आप नहीं जानते होंगे।

The Hidden Moon Mysteries: करोड़ों साल पुराना चांद का रहस्य

चांद हमेशा से इंसानों के लिए एक रहस्य रहा है। रात को रोशन करने वाला यह उपग्रह आखिर कैसे बना ? इस सवाल का जवाब अब वैज्ञानिकों ने दशकों की शोध के बाद खोज लिया है।

अब तक सबसे ज्यादा मानी जाने वाली थ्योरी यह रही है कि करीब साढ़े चार अरब साल पहले, मंगल ग्रह के आकार का एक प्रोटोप्लैनेट, जिसे थिया नाम दिया गया है, पृथ्वी से टकराया था। इस भीषण टक्कर से उड़े मलबे ने धीरे-धीरे मिलकर हजारों साल में चांद का रूप लिया। लेकिन अब सुपरकंप्यूटर पर की गई नई और ज्यादा बारीक सिमुलेशन स्टडी कहती है कि यह पूरी प्रक्रिया हजारों साल में नहीं, बल्कि सिर्फ पांच घंटे के भीतर पूरी हो गई होगी।

किसने और कैसे की यह रिसर्च ?

यह नई स्टडी साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के वैज्ञानिकों की टीम ने की है। इस टीम की अगुवाई एडीन डेंटन ने की। पहले की सिमुलेशन में सिर्फ गुरुत्वाकर्षण और द्रव जैसे व्यवहार को ध्यान में रखा जाता था, लेकिन इस बार वैज्ञानिकों ने चट्टानों की मजबूती और तापमान को भी मॉडल में शामिल किया। यही नया पहलू पूरे नतीजे को बदल देता है।

जब टकराने वाले पिंड ठंडे और मजबूत होते हैं, तो टक्कर के बाद मलबा तुरंत इकट्ठा होकर एक पूरा चांद बना सकता है, जबकि गर्म और कमजोर पिंडों की टक्कर से एक धीमे-धीमे बनने वाली मलबे की डिस्क बनती है। यह रिसर्च साइंस जर्नल The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित हुई है।

5 घंटे में कैसे बना पूरा चांद ?

नई स्टडी के मुताबिक, अगर टक्कर के समय पृथ्वी और थिया दोनों का आंतरिक तापमान लगभग बराबर था, तो टक्कर से निकला मलबा धीरे-धीरे जमा होने के बजाय बहुत तेजी से एक साथ जुड़ गया। सिमुलेशन में देखा गया कि यह पूरी प्रक्रिया महज पांच घंटे में पूरी हो गई और सीधे एक ठोस, पूरी तरह बना हुआ चांद अस्तरित्व में आ गया। यह पुरानी थ्योरी से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है, जिसमें चांद के बनने में हजारों साल लगने की बात कही जाती थी।

पहले भी आ चुके हैं ऐसे चौंकाने वाले खुलासे

यह पहली बार नहीं है जब सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन ने चांद के तेज गति से बनने की बात कही हो। साल 2022 में डरहम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक जैकब केगेरिस की टीम ने भी कॉस्मा नाम के सुपरकंप्यूटर से एक बड़ी स्टडी की थी। सामान्य कंप्यूटर पर सिमुलेशन में करीब एक लाख से दस लाख कणों को ही मॉडल किया जा सकता है, जबकि कॉस्मा सुपरकंप्यूटर दस करोड़ कणों तक को ध्यान में रख सकता है।

इतने ज्यादा रिजॉल्यूशन के कारण नतीजे कहीं ज्यादा सटीक माने जाते हैं। उस स्टडी में भी पाया गया था कि टक्कर के बाद बना मलबा धीरे-धीरे नहीं, बल्कि कुछ ही घंटों में एक साथ जुड़कर चांद का रूप ले सकता है।

मिल सकता है चांद की पुरानी पहेलियों का जवाब

चांद से जुड़े कई सवाल आज भी वैज्ञानिकों को उलझन में डालते हैं, जैसे चांद की चट्टानों की बनावट पृथ्वी की मेंटल चट्टानों से इतनी मिलती-जुलती क्यों है, चांद की मौजूदा कक्षा कैसे बनी, और चांद का बाहरी हिस्सा इतना पतला और अलग क्यों दिखता है। तेज गति से बनने वाली इस नई थ्योरी से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ज्ञानिकों का मानना है कि अगर चांद तुरंत एक ठोस पिंड के रूप में बना, तो इससे यह समझने में आसानी होगी कि इसका इंटीरियर पूरी तरह पिघला हुआ क्यों नहीं है।

धरती के बाहर के चाँद खोजने पर असर 

इस स्टडी का असर सिर्फ हमारे चांद तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर चट्टानी ग्रहों के आसपास चांद बहुत तेजी से बनते हैं, तो दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों पर मलबे की डिस्क बहुत कम समय तक टिकती होगी। इसका मतलब है कि एक्सोमून यानी दूसरे सौरमंडलों के चांद को खोजने के लिए मलबे की डिस्क ढूंढना कारगर तरीका नहीं हो सकता, कम से कम चट्टानी ग्रहों के मामले में तो। हालांकि गैस के विशाल ग्रहों के आसपास बनने वाले चांद पर यह बात लागू नहीं होती, क्योंकि वहां चांद टक्कर से नहीं बल्कि ग्रह बनने के बाद बचे मलबे से बनते हैं।

चाँद का जन्म 

चांद के जन्म की कहानी अब पहले से कहीं ज्यादा रोमांचक हो गई है। सुपरकंप्यूटर की मदद से की गई इन नई खोजों ने यह साबित कर दिया है कि हमारी धरती और उसके अकेले प्राकृतिक उपग्रह के बीच का रिश्ता उतना सीधा नहीं, जितना अब तक समझा जाता रहा। आने वाले समय में और ज्यादा शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर और बेहतर मॉडल इस्तेमाल होने पर चांद के जन्म की असली कहानी और भी साफ हो सकती है।

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