Ayush Varshney arrested in cryptocurrency scam: आयुष वार्ष्णेय को CBI ने क्रिप्टोकरेंसी घोटाला केस में गिरफ्तार किया है। आयुष कोलंबो भागने की कोशिश कर रहा था।
Ayush Varshney arrested in cryptocurrency scam
डार्विन लैब के सह-संस्थापक और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर आयुष वार्ष्णेय को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के मामले में अरेस्ट किया है। आयुष को सीबीआई ने उस समय दबोचा, जब वह मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे से श्रीलंका के कोलंबो भागने की कोशिश कर रहा था। वार्ष्णेय के खिलाफ पहले से ही लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी था। जिसके आधार पर इमिग्रेशन अधिकारीयों ने उसे रोका और सीबीआई के हवाले किया। यह CBI की GainBitcoin क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में पहली बड़ी गिरफ्तारी है। जिसे भारत का सबसे बड़ा क्रिप्टो धोखाधड़ी का मामला माना जा रहा है।
घोटाले की शुरुआत और काम करने का तरीका
गेन बिटकॉइन की शुरुआत 2015 में महाराष्ट्र के कंप्यूटर साइंस इंजीनियर अमित भारद्वाज और उनके भइआ अजय भारद्वाज ने की थी। उन्होंने इस घोटाले की शुरुआत Variabletech Pvt. Ltd. के जरिए की थी। अमित की 15 जनवरी 2022 को मृत्यु हो गई थी। यह एक पॉन्जी स्किम और मल्टी-लेवल मार्किटिंग मॉडल पर आधारित था।
निवेशक ऐसे फंसे
निवेशकों को 18 महीने तक 10 प्रतिशत रिटर्न का लालच दिया गया। निवेशक बाहरी एक्सचेंज से बिटकॉइन खरीदकर कंपनी के प्लेटफॉर्म पर क्लाउड माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट के जरिए जमा करते थे। शुरुआत में कुछ महीने तक बिटकॉइन में रिटर्न दिए गए, जिससे विश्वास बनाया गया। 2017 क बाद पेमेंट देरी से होने लगी। बाद में कंपनी के खुद के MCAP टोकन दिए गए। इन टोकन की वैल्यू कम थी। जिससे हजारों निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। स्कीम MLM पर चलती थी। जिसमें पुराने निवेशक नए लोगों को भर्ती करके कमीशन कमाते थे। फंड्स का दुरूपयोग किया गया और अंततः धोखाधड़ी साबित हुई।
कोर्ट ने केस सीबीआई को ट्रांसफर किया
जम्मू कश्मीर, दिल्ली , महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में FIRs दर्ज की गई। जिनके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में यह केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में देश भर में 60 से भी अधिक ठिकानों पर छापेमारी की।
मास्टरमाइंड आयुष वार्ष्णेय की भूमिका
डार्विन लैब प्राइवेट लिमिटेड ने पुरे घोटाले का तकनीकी बुनियादी ढांचा तैयार किया। जिसमें शामिल थे:
- GBMiners.com बिटकॉइन माइनिंग पूल प्लेटफॉर्म
- बिटकॉइन पेमेंट गेटवे
- CoinE Bank बिटकॉइन वॉलेट
- गेन बिटकॉइन इन्वेस्टर वेबसाइट
- MCAP क्रिप्टो टोकन
मामले में सीबीआई का ब्यान
केंद्रीय जांच ब्यूरो के अनुसार, “डार्विन लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने इस धोखाधड़ी योजना के संपूर्ण तकनीकी ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”आयुष वार्ष्णेय इस कंपनी के को-फाउंडर थे। इसलिए वे मुख्य आरोपी माने गए। अन्य सह-संस्थापक साहिल बघला और चीफ कैपिटल ऑफिसर निकुंज जैन भी आरोपी हैं।
भारत का सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी घोटाला
सीबीआई और अन्य सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार, यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी घोटाला है। जिसकी अनुमानित राशि 20,000 करोड़ है। इस घोटाले में 8000 निवेशकों को ठगा गया। पैसों के लें दें हवाला के जरिये किए गए।
क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के अन्य मुख्य आरोपी
मुख्य प्रमोटर : अमित भारद्वाज की मौत हो चुकी है। अजय भारद्वाज और महेंद्र भारद्वाज फरार चल रहे हैं। ED ने 2024 में इस केस में बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की संपत्तियां अटैच की थी। कुंद्रा का जुहू फ़्लैट, पुणे स्थित बंगला और दुबई के ऑफिस आदि को अटैच किया था। राज कुंद्रा की 97 करोड़ की कुल संपतियां अटैच की गई थी। लेकिन वह इस गिरफ्तारी का सीधा आरोपी नहीं है। कुंद्रा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अलग से जांच चल रही है।
क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में CBI की जांच
भारत के इस महाघोटाले में सीबीआई की जांच जारी है। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। आयुष वार्ष्णेय को गिरफ्तार करने के बाद अन्य आरोपियों पर फोकस है।





