Judge Yashwant Verma Resigns

Judge Yashwant Verma: जज यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, जले हुए नोटों का हुआ था विवाद

Judge Yashwant Verma Resigns: जस्टिस यशवंत वर्मा ने 10 अप्रैल को इलाहबाद हाई कोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है।

जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा

इलाहबाद हाई कोर्ट जे जज जस्टिस यशवंत वर्मा (Judge Yashwant Verma ) ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। यह इस्तीफा कैश कांड के लंबे विवाद के बाद आया है। जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर आग लगने के दौरान बड़ी मात्रा में जले हुए और अधजले नोट मिलने का मामला था।

Judge Yashwant Verma का पूरा मामला

14 मार्च 2025 की रात 11:34 बजे जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली के तुगलक क्रेसेंट स्थित आधिकारिक बगंले के स्टोररूम में आग लग गई थी। उस दौरान दमकल कर्मियों और पुलिस को बड़ी मात्रा में स्टोररूम में जले हुए और अधजले हुए 500 रुपए के नोट मिले थे। शुरूआती रिपोर्ट में इसकी अनुमानित राशि 15 करोड़ रुपए बताई गई थी लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। कुछ नोट पत्तों में सड़क पर भी मिले थे।

कैश काण्ड मामला

जस्टिस यशवंत वर्मा उस समय दिल्ली हाई कोर्ट के जज थे। वे इलाहबाद हाई कोर्ट से ट्रांसफर  होकर दिल्ली हाई कोर्ट में आए थे। उन्होंने इस नकदी से किसी भी तरह के सबंध से इंकार कर दिया था और इसे पूरी तररह बेबुनियाद बताया था।

Judge Yashwant Verma पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई

घटना के तुरंत बाद तत्कालीन CJI जस्टिस संजीव खन्ना ने तीन जजों की इन-हाउस जांच कमेटी गठित की। जांच कमेटी ने निष्कर्ष निकाला कि स्टोररूम पर जस्टिस वर्मा और उनके परिवार का कंट्रोल था। नकदी की मौदूगी की पुष्टि हुई। यह न्यायिक नैतिकता का गंभीर उल्लंघन था।

कैश कांड का जस्टिस वर्मा पर असर

CJI जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा को स्वैच्छिक रिटायरमेंट या इस्तीफा देने का सुझाव दिया था। लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। कैश कांड के बाद जस्टिस वर्मा को न्यायिक काम नहीं सौंपा गया। उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया।

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग

इन-हाउस रिपोर्ट के आधार पर संसद में उनके खिलाफ महाभियोग की तैयारी शुरू हुई। लोकसभा स्पीकर ने प्रस्ताव स्वीकार किया और जज एक्ट 1968 के तहत तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की याचिकाओं को खारिज किया। जिससे संसदीय जांच आगे बढ़ी।

जस्टिस वर्मा लगातार कहते रहे कि जांच निष्पक्ष नहीं हुई और आरोपों को खारिज करते रहे।

Judge Yashwant Verma ने इस्तीफा क्यों दिया ?

इस्तीफा देने से जस्टिस वर्मा महाभियोग से बच गए। अगर संसद उन्हें हटा देती तो पेंशन और अन्य रिटायरमेंट बेनेफिट्स नहीं मिलते। इस्तीफा स्वीकार होने पर उनको मिलने वाले लाभ बरकरार रहेंगे। कुछ पूर्व जजों और बार एसोसिएशन ने भी जस्टिस वर्मा के इस्तीफे की मांग की थी।

Judge Yashwant Verma कौन थे ?

वे इलाहबाद हाई कोर्ट के जज थे। बाद में बदली होकर दिल्ली हाई कोर्ट में आए थे। कैश कांड के बाद उन्हें फिर से इलाहबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। 2025 का यह मामला करीब एक साल से चला आ रहा और आज जस्टिस वर्मा का इस्तीफा आया।

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