Swine flu outbreak in India

Swine Flu का प्रकोप: दिल्ली में 1777 केस, जानें लक्षण और बचाव

Swine flu outbreak in India: दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहरों में स्वाइन फ्लू तेजी से पैर पसार रहा है। बदलते मौसम में वायरस फैल रहा है। एडवाइजरी जारी।

दिल्ली में Swine flu के कितने मामले हैं?

स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में इस साल इंफ्लुएंजा-A के 2300 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें H1N1 यानि स्वाइन फ्लू के 1777 से ज्यादा मामले शामिल हैं। पिछले एक दिन में H1N1 के 114 मामले दर्ज किए गए हैं। जिससे साफ है कि संक्रमण की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। कुल मिलाकर इन्फ्लुएंजा के 159 मामले सामने आए हैं। जिनमें से 155 मामले इंफ्लुएंजा-A के थे। इनमें 114 H1N1, दो H1 , एक H3 और 38 अन्य  इन्फ्लुएंजा-ए में शामिल हैं। साथ ही इन्फ्लुएंजा-B के भी चार मामले दर्ज हुए हैं।

Swine flu का दिल्ली में प्रकोप

जो आंकड़े सबसे ज्यादा चौंकाते हैं वह है पिछले साल की तुलना। दिल्ली में अब संक्रमित मरीजों की संख्या 1777 तक पहुंच चुकी है। जो पिछले साल के 229 की तुलना में आठ गुना ज्यादा है। यानि बीमारी सिर्फ बढ़ी नहीं है बल्कि पिछले साल के मुकाबले विस्फोटक ढंग से फैली है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल के प्रमुख भी H1N1 पॉजिटिव पाए गए हैं।

Swine flu को लेकर सरकार सतर्क

इस बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र सरकार भी सतर्क हो गई है। दिल्ली एनसीआर में तेजी से बढ़ते मामलों पर स्वास्थ्य मंत्रालय के स्तर पर आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। सिर्फ दिल्ली ही नहीं महाराष्ट्र के नागपुर जैसे शहरों में भी मानसून के साथ स्वाइन फ्लू के मामलों में वृद्धि देखी गई है।

Swine flu के मामले इस बार क्यों इतने बढ़े ?

डॉक्टरों की मानें तो इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ी वजह वायरस के स्ट्रेन में बदलाव है। स्वाइन फ्लू का स्ट्रेन कुछ सालों में बदलता रहता है। जिससे लोगों की इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है, वायरस आसानी से हमला कर पाता है। दूसरी बड़ी वजह AC का बढ़ता इस्तेमाल है।

जिस तेजी से एसी का इस्तेमाल बढ़ा है, उससे संक्रमण फैलने में मदद मिल रही है। जबकि पहले यह बीमारी सर्दी के मौसम में ज्यादा फैलती थी। इसके अलावा मानसून में लगातार उतारस – चढ़ाव, बंद कमरों में भीड़-भाड़ , हवा ठीक से न आना-जाना भी संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। राहत की बात ये है कि दिल्ली सरकार के अनुसार, अस्पतालों में बेड, डॉक्टर, दवाओं और जरूरी उपकरणों की कोई कमी नहीं है।

Swine flu के लक्षण

स्वाइन फ्लू के लक्षण शुरुआत में आम सर्दी-जुकाम जैसे ही होते हैं। इसलिए लोग इसे हल्के में ले लेते हैं। तेज बुखार, गले में खराश,लगातार खांसी, बदन दर्द, सिर दर्द , ठंड लगना और थकान इसके सामान्य लक्षण हैं। कुछ मरीजों में उलटी और दस्त जैसे लक्षण भी देखे गए हैं। गंभीर मामलों में सांस लेने में तकलीफ और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरने जैसी समस्याएं भी होती हैं। ऐसे में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

स्वाइन फ्लू से किसे है सबसे ज्यादा खतरा ?

छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, डायबिटीज के मरीजों हृदय रोग या फेफड़े की बीमारी से जूझ रहे लोगों को इस वायरस से सबसे ज्यादा खतरा है। हालांकि इस बार सक्रमण हर उम्र वर्ग के लोगों को चपेट में ले रहा है।

बचाव के उपाय

भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और मास्क का इस्तेमाल करें। खांसते-छींकते समय रुमाल या कोहनी का सहारा लें ताकि संक्रमण न फैले। बार बार साबुन से हाथ धोना सबसे कारगर उपाय है। अपनी आंख, कान और नाक को बार बार छूने से बचें। पौष्टिक खानपान और भरपूर पानी पीकर शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखें। AC का तापमान बहुत कम न रखें और कमरे में हवा का आना जाना बना रहने देने दें। बुखार या गले में खराश होने पर भीड़ में जाने से बचें।

इलाज में देरी न करें

अगर तेज बुखार, खांसी या साँस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें तो घरेलू उपचार पर भरोसा करने के बजाए डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच-उपचार और दवा से यह बिमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है। जबकि देरी करने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा लेने से बचें। हाई रिस्क वाले लोगों को हर साल फ्लू का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है। टीका संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

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