CJI Surya Kant called Saurav Das cockroach

CJI Surya Kant ने Saurav Das को कहा था Cockroach, अभिजीत दीपके का नया खुलासा

CJI Surya Kant की cockroach वाली टिपण्णी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने Saurav Das को लेकर इस बारे में बड़ा खुलासा किया है।

CJI Surya Kant ने की थी युवाओं की कॉकरोच से तुलना

मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान कुछ युवाओं की तुलना कॉकरोच या परजीवी से की थी। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग प्रोफेशन में जगह नहीं बना पाते तो मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहुत बवाल मचा।

अभिजीत दीपके, जो उस समय अमेरिका में पढ़ थे, ने तुरंत पोस्ट किया-‘क्या होगा जो हमारे सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?’ इसी से कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हुआ। बाद में यह संगठन नीट पेपर लीक के खिलाफ बड़े आंदोलन का चेहरा बना और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक पहुंच गया।

कौन है असली Cockroach? दीपके का खुलासा

न्यूज़ 24 को दिए गए इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने साफ़ कहा कि वो कॉकरोच शब्द सौरव दास के लिए ही था। उनके अनुसार, उस समय सौरव दास ही जजों और न्यायीक व्यवस्था पर सबसे ज्यादा लिख रहे थे। दीपके ने सौरव दास को ओजी कॉकरोच तक कह दिया।

सौरव दास का समर्थन

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने भी इस दावे को समर्थन दिया। उन्होंने बताया कि उस दौरान वे कारवां मैगजीन के लिए जस्टिस सूर्यकांत की प्रोफाइल तैयार कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने कई आरटीआई भी लगाई थी। इससे पहले वे भारत के पूर्व प्रधान न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ पर भी लिख चुके थे। सौरव के अनुसार, कई वकीलों और रिटायर्ड जजों ने उनसे संपर्क कर कहा था कि चीफ जस्टिस की ये टिपण्णी शायद उन्ही के संदर्भ में है।

CJI Surya Kant का स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के वर्तमान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुरू से ही अपनी बात को स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी टिपण्णी फर्जी डिग्री वालों के बारे में थी। जो वकालत, मीडिया या अन्य क्षेत्रों में घुसपैठ कर सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं। युवाओं की आलोचना करने का उनका कोई इरादा नहीं था। फिर भी ‘ कॉकरोच’ शब्द वायरल हो गया और एक नया आंदोलन खड़ा हो गया।

पुरानी बहस फिर ज़िंदा हुई

अभिजीत दीपके का ये खुलासा पुरानी बहस को फिर से ज़िंदा कर रहा है। एक अदालती टिपण्णी से शुरू हुई कहानी आज भी सुर्खियां बना रही है। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक व्यक्तिगत संदर्भ था या इससे बड़े सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं। CJP वाले इसे अपना मूल क्षण मानते हैं। अब देखना होगा कि इस दावे के बाद क्या नया मोड़ आता है।

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