India vs South Korea Hockey Match: भारतीय महिला हॉकी टीम ने Asian Games 2026 के सेमीफ़ाइनल में दक्षिण कोरिया को 2-0 से हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई। अब गोल्ड के लिए चीन से मुक़ाबला।
India vs South Korea Hockey Match
आइची-नागोया, 30 सितंबर। भारतीय बेटियों ने एक बार फिर देश को मुस्कुराने की वजह दे दी है। भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेल 2026 के सेमीफ़ाइनल में दक्षिण कोरिया को 2-0 से हराकर फ़ाइनल में जगह पक्की कर ली। अब गोल्ड मेडल के लिए उसका सामना गत चैंपियन चीन से होगा।
Asian Games 2026: भारतीय महिला हॉकी फ़ाइनल में
मैच आसान नहीं था। गिफू प्रीफ़ेक्चुरल ग्रीन स्टेडियम में खेले गए इस मुक़ाबले में पूरे पहले हाफ़ और तीसरे क्वार्टर के बड़े हिस्से तक भारत गोल के लिए तरसता रहा। कोरियाई खिलाड़ियों ने अनुशासित रक्षापंक्ति के दम पर भारतीय आक्रमण को बार-बार रोका। भारत को 21वें मिनट में अपना छठा पेनल्टी कॉर्नर मिल चुका था, फिर भी बात नहीं बनी।
लेकिन इस टीम की ख़ासियत यही है कि वह दबाव में बिखरती नहीं। मौक़े बनते रहे और भारतीय खिलाड़ियों ने सब्र नहीं खोया।
दो मिनट में मैच बदला
44वें मिनट में ईशिका चौधरी ने गोल कर भारत को बढ़त दिलाई और 48वें मिनट में कप्तान सलीमा टेटे ने दूसरा गोल दाग दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार ईशिका का गोल पेनल्टी कॉर्नर से आया। (गोल के मिनट को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में एक मिनट का फ़र्क़ है।) दो गोल के बाद कोरिया दबाव में आ गया और भारतीय खेमे में राहत की सांस लौट आई।
आखिरी मिनटों की घबराहट
कहानी यहीं ख़त्म नहीं हुई। खेल ख़त्म होने से क़रीब दो मिनट पहले कोरिया को लगातार चार पेनल्टी कॉर्नर मिले, जो पूरे मैच में उसके एकमात्र पेनल्टी कॉर्नर थे। स्टेडियम में सांसें थम गईं। पर भारतीय रशर्स ने हर बार गेंद को तेज़ी से रोका और गोलकीपर सविता पुनिया को कोई बड़ी परीक्षा नहीं देनी पड़ी। फ़ाइनल हूटर बजा तो स्कोर 2-0 ही रहा।
अब फाइनल में चीन से टक्कर
भारत का सामना अब गत चैंपियन चीन से होगा। चीन ने दूसरे सेमीफ़ाइनल में जापान को शूटआउट में हराया था और फ़ाइनल शुक्रवार को खेला जाएगा। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया को कांस्य पदक के लिए जापान से भिड़ना है।
44 साल का इंतज़ार ख़त्म होगा?
इस जीत की अहमियत इसलिए भी बड़ी है कि भारतीय टीम अब एशियाई खेलों में 44 साल बाद स्वर्ण पदक जीतने से सिर्फ़ एक जीत दूर है। पिछले एशियाई खेलों में भारतीय महिलाओं को कांस्य पदक मिला था, इसलिए इस बार पदक का रंग बदलने की उम्मीदें और मज़बूत हैं। पूरे देश की निगाहें अब शुक्रवार के मुक़ाबले पर टिकी हैं।
भारतीय हॉकी के लिए अहम जीत
यह जीत सिर्फ़ दो गोल की नहीं, टीम के मानसिक बल की है। तीन क्वार्टर तक गोल न मिलने के बावजूद टीम ने न जल्दबाज़ी की, न हौसला खोया। कप्तान का गोल, डिफ़ेंस की सूझबूझ और गोलकीपर का भरोसा, तीनों ने मिलकर इस जीत की कहानी लिखी।






