Natasha Narwal UK Permission: नताशा नरवाल यूके यात्रा पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला। 2 नवंबर से 1 दिसंबर तक अकादमिक कॉन्फ्रेंस के लिए मिली शर्तों के साथ अनुमति, जानें पूरा मामला
Natasha Narwal को UK जाने की इजाजत
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के मामलों में आरोपी नताशा नरवाल को ब्रिटेन जाने की अनुमति दे दी है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को आए इस फैसले में अदालत ने उन्हें एक अकादमिक कॉन्फ्रेंस के लिए यूके जाने की मंजूरी दी। यह खबर सुनते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोग इसे पढ़ाई और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की जीत बता रहे हैं, तो कुछ सवाल उठा रहे हैं कि आरोपी विदेश जाकर वापस आएगी या नहीं। आइए पूरा मामला आसान भाषा में समझते हैं।
Natasha Narwal को कितने दिन के लिए मिली अनुमति
नताशा नरवाल यूके (Natasha Narwal) जाना चाहती थीं 2 नवंबर से 1 दिसंबर 2026 तक। इस दौरान वे अपने पीएचडी सुपरवाइजर से मिलेंगी और यूनिवर्सिटी के सालाना सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। उनकी योजना शोध से जुड़ा काम करने की भी थी। यानी यह करीब एक महीने की यात्रा है, जिसका मकसद पढ़ाई और रिसर्च बताया गया है।
Natasha Narwal मामले हाई कोर्ट में क्या हुआ?
जस्टिस अमित बंसल ने नताशा के वकील आदित एस पुजारी की दलीलें सुनने के बाद अनुमति दी। इससे पहले निचली अदालत ने यह मांग ठुकरा दी थी। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने कहा था कि विदेश यात्रा का अधिकार पूर्ण नहीं है। नताशा ने इसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर को उनकी याचिका पर नोटिस जारी कर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने इसका विरोध किया। सरकारी पक्ष ने यह आशंका भी रखी कि अगर वे वापस न लौटीं और शरण मांग ली तो क्या होगा। साथ ही सख्त शर्तें लगाने की मांग की गई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत यात्रा के अधिकार को रोका नहीं जा सकता और यह एक जानी-मानी यूनिवर्सिटी है जहां वे पढ़ाई के लिए जाना चाहती हैं।
कोर्ट ने कौन सी शर्तें लगाईं
अनुमति बिना शर्त नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार शर्तें ये हैं:
- व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानती पेश करना, और यह लिखित वचन देना कि वे भारत लौटेंगी तथा यूके में शरण नहीं मांगेंगी।
- हर मामले में 50,000 रुपये की जमानत राशि।
- यूके में रहते हुए अपने खिलाफ चल रहे मामले के गुण-दोष पर कोई बयान न देना।
कौन हैं नताशा नरवाल?
नताशा नरवाल जेएनयू की पीएचडी छात्रा और पिंजरा तोड़ संगठन से जुड़ी कार्यकर्ता हैं। उन्हें 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़ी तीन एफआईआर में आरोपी बनाया गया है। वे 2020 के दिल्ली दंगों के तीन मामलों में आरोपी हैं। इनमें बड़ी साजिश का मामला भी शामिल है, जो UAPA के तहत दर्ज है। इन मामलों में अभी सुनवाई जारी है और उन पर लगे आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं।
इस फैसले के मायने
यह फैसला इस बात की याद दिलाता है कि किसी आपराधिक मामले का लंबित होना अपने आप में विदेश जाने से रोकने की वजह नहीं बनता। अदालतें हर मामले में आरोपों की गंभीरता, सुनवाई का चरण और भाग जाने की आशंका जैसी बातें देखती हैं। यहां हाई कोर्ट ने पढ़ाई के मकसद को अहम माना और साथ में वापसी सुनिश्चित करने वाली शर्तें भी जोड़ दीं।
अब नताशा नरवाल को तय तारीखों में यात्रा करनी है और शर्तों का पालन करना है। उनका दिल्ली दंगा केस अपनी गति से चलता रहेगा। 1 दिसंबर के बाद उनकी वापसी और केस की अगली सुनवाइयों पर सबकी नज़र रहेगी।
क्सर पूछे जाने वाले सवाल
नताशा नरवाल को यूके जाने की अनुमति किसने दी?
दिल्ली हाई कोर्ट ने, जस्टिस अमित बंसल की पीठ ने।
वे यूके कब तक रहेंगी?
2 नवंबर से 1 दिसंबर 2026 तक।
यूके जाने का मकसद क्या है?
पीएचडी सुपरवाइजर से मुलाकात, यूनिवर्सिटी का सालाना सम्मेलन और शोध कार्य।
क्या उन पर कोई शर्त लगी है?
हां, बॉन्ड, जमानती, भारत लौटने और शरण न मांगने का वचन, और केस पर बयान न देने की शर्त।






