Suhas Yathiraj: आईएएस अधिकारी सुहास यथिराज ने Asian Para Games 2026 में पुरुष एकल SL4 बैडमिंटन में भारत को Bronze Medal दिलाया। पूरी खबर और उनका सफर पढ़ें।
Suhas Yathiraj ने Bronze Medal जीता
सुहास यथिराज ने एशियाई पैरा गेम्स 2026 में भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया है। जापान के आइची-नागोया में चल रहे इन खेलों में आईएएस अधिकारी सुहास ने बैडमिंटन के पुरुष एकल SL4 वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। सेमीफाइनल में हार के बाद उन्हें तीसरा स्थान मिला। हार का मलाल अपनी जगह है, लेकिन एशिया के सबसे मज़बूत खिलाड़ियों के बीच पोडियम तक पहुंचना छोटी बात नहीं।
Suhas Yathiraj का कांस्य पदक तक का सफर
इस टूर्नामेंट में सुहास की शुरुआत शानदार रही। ग्रुप चरण के पहले मुकाबले में उन्होंने बांग्लादेश के जोयतु धर को 21-8, 21-11 से सीधे गेमों में हराया। क्वार्टरफाइनल में दक्षिण कोरिया के चो नादान उनके सामने थे, और सुहास ने यह मैच 21-12, 21-16 से जीतकर आख़िरी चार में जगह बनाई।
Suhas Yathiraj का मुकाबला
सेमीफाइनल में उनका मुकाबला इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान से तय था, जो SL4 वर्ग के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। यह मुकाबला सुहास के पक्ष में नहीं गया, पर पैरा बैडमिंटन में सेमीफाइनल हारने वाले खिलाड़ी को कांस्य मिलता है। इसी नियम से सुहास पदक विजेताओं की सूची में शामिल हुए। उसी दिन भारत को पैरा बैडमिंटन में तीन कांस्य मिले। सुहास के साथ कृष्णा नागर और नित्या श्री की जोड़ी और अभिजीत सखूजा भी तीसरे स्थान पर रहे।
Suhas Yathiraj: अफसर भी, चैंपियन भी
सुहास की कहानी इसलिए ख़ास है कि वे दो ज़िम्मेदारियां एक साथ निभाते आए हैं। एक तरफ़ 2007 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में प्रशासन की जवाबदेही, दूसरी तरफ़ कोर्ट पर देश का प्रतिनिधित्व। नोएडा के जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने कोविड के दौर में मोर्चा संभाला, और बताया जाता है कि पैरालंपिक की तैयारी का ज़्यादातर अभ्यास उन्होंने दफ़्तर के बाद रातों में किया। वे जन्म से एक टखने की समस्या के साथ खेलते हैं, जिसके कारण उनका वर्ग SL4 है।
वे पैरालंपिक में पदक जीतने वाले पहले आईएएस अधिकारी भी हैं। यह उपलब्धि उन लाखों लोगों को हौसला देती है जो नौकरी और जुनून के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं।
Suhas Yathiraj के पदकों की लंबी सूची
सुहास के लिए पोडियम नई बात नहीं है। उनके सफर के कुछ बड़े पड़ाव ये हैं:
- टोक्यो पैरालंपिक 2020 में रजत पदक, जहां फाइनल में वे फ्रांस के लुकास मजूर से हारे।
- पेरिस पैरालंपिक 2024 में फिर रजत, यानी लगातार दो पैरालंपिक में पदक। इस उपलब्धि वाले वे भारत के अकेले पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।
- एशियाई पैरा गेम्स हांगझोउ में स्वर्ण पदक, जहां फाइनल में उन्होंने फ्रेडी सेतियावान को हराया था।
- 2018 जकार्ता एशियाई पैरा गेम्स में टीम स्पर्धा का कांस्य।
- 2024 BWF पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में SL4 का स्वर्ण।
इस सूची के सामने नागोया का कांस्य छोटा लग सकता है। लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर, लगातार कई बड़े टूर्नामेंट खेलते हुए, शीर्ष स्तर पर टिके रहना ही अपने आप में बड़ी बात है।
भारत के लिए पदक
भारतीय पैरा बैडमिंटन आज एशिया में एक मज़बूत ताकत है। सुहास जैसे अनुभवी खिलाड़ी जूनियर खिलाड़ियों के लिए मिसाल हैं। इस बार भी सुकांत कदम, अभिजीत सखूजा और कृष्णा नागर जैसे नाम उसी कतार में खड़े हैं। हर पदक यह भरोसा मज़बूत करता है कि सही सुविधा और समर्थन मिले तो भारत के पैरा खिलाड़ी दुनिया के किसी भी मंच पर मुकाबला कर सकते हैं।
सुहास का सफर अभी थमा नहीं है। कांस्य के बाद उनकी नज़र अगली अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर होगी, और उनके पिछले प्रदर्शन को देखते हुए उम्मीद यही है कि वे फिर बड़े मंच पर लौटेंगे। फिलहाल देश को उन पर गर्व है।






