Ambala Jail ने एक अनोखी पहल शुरू की है। अब आम नागरिक भी जेल में बनी कैदियों के हाथ से बनीं रोटी खा पाएंगे। अंबाला सेंट्रल जेल ने पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की है।
Ambala Jail के समोसे
अंबाला सेंट्रल जेल के बाहर पहले से चल रही कैंटीन में कैदी बिस्किट, समोसे, चाय और अन्य बेकरी आइटम बनाकर बेचते हैं। अब इसमें जेल जैसी सादी लेकिन साफ-सुथरी रोटी (Jail Ki Roti) और संबंधित भोजन को भी शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। कैदी जेल रसोई और फैक्ट्री में प्रशिक्षित होकर ये सामान तैयार करते हैं। सख्त निगरानी में साफ-सफाई और गुणवत्ता (Quality of prison Roti ) का ख्याल रखा जाता है। आम लोग सस्ते दामों पर शुद्ध और ताजा सामान खरीद सकते हैं।
Ambala Jail विभाग की योजना
यह पहल हरियाणा जेल विभाग (Haryana Prisons Department) की उन योजनाओं से जुड़ी है, जहां अच्छे आचरण वाले कैदियों को काम दिया जाता है। उन्हें मानदेय मिलता है और सजा में छूट का मौका भी। इससे कैदी आत्मनिर्भर बनते हैं और बाहर निकलने के बाद रोजगार की संभावना बढ़ती है।
Ambala Jail की Roti क्यों खाएंगे आम लोग ? खासियत जानें
कई लोग जेल की रोटी को सादी, बिना मिलावट वाली और घर जैसी मानते हैं। कुछ इसे ज्योतिषीय (Astrological) मान्यताओं से भी जोड़ते हैं, लेकिन असली महत्व शुद्धता और किफायती कीमत का है। बाजार के मुकाबले यहां सामान सस्ता और बेहतर क्वालिटी का बताया जा रहा है। देशी घी वाले बिस्किट और ताजे समोसे पहले से ही लोकप्रिय हो चुके हैं। अब रोटी और पूरा भोजन पैकेट भी इसी लाइन में आने की उम्मीद है।
जेल प्रशासन के कैदियों के सुधार पर फोकस
जेल अधीक्षक और अधिकारियों का फोकस कैदियों के सुधार पर है। काम करते हुए कैदी अनुशासन सीखते हैं, स्किल विकसित करते हैं और समाज के प्रति सकारात्मक नजरिया अपनाते हैं। आम लोगों को भी फायदा होता है—सस्ता, स्वच्छ और स्वादिष्ट खाना मिलता है।
कैदियों को होगा लाभ
यह पायलट प्रोजेक्ट सिर्फ खाने की बात नहीं। यह कैदियों के पुनर्वास का माध्यम है। कई राज्यों में ऐसे प्रयोग हो चुके हैं, जहां जेल उत्पाद बाजार में बिकते हैं। अंबाला सेंट्रल जेल हरियाणा में इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। कैंटीन सुबह से शाम तक खुली रहती है और सुरक्षा व्यवस्था पूरी रहती है।
लोगों में जेल की रोटी खाने के लिए उत्साह
लोगों में उत्साह है। कई स्थानीय निवासी पहले से ही यहां से सामान ले जाते हैं। अगर रोटी और भोजन पैकेट नियमित रूप से उपलब्ध हुए तो मांग और बढ़ सकती है। इससे जेल की आय भी सुधर सकती है, जो कैदियों के कल्याण पर खर्च हो सकती है।
अंबाला सेंट्रल जेल की यह कोशिश जेल सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। आम आदमी अब जेल की दीवारों के बाहर बैठकर उस स्वाद का अनुभव कर सकता है, जो पहले सिर्फ कैदियों तक सीमित था। शुद्धता, किफायत और सुधार—तीनों एक साथ।





