Anna Hazare ने महाराष्ट्र के अहिल्यनगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास बैठकर 2 घंटे का मौन आंदोलन किया। उन्होंने नीट पेपर लिक मामले में छात्रों का समर्थन किया।
Anna Hazare ने रखा मौन व्रत
अन्ना हजारे ने 23 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (अहमदनगर) में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास दो घंटे (सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक) का मौन आंदोलन (मौन व्रत/साइलेंट प्रोटेस्ट) किया। यह दिल्ली के जंतर-मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) और अन्य छात्र संगठनों के NEET पेपर लीक विरोधी आंदोलन के समर्थन में था, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुख है।
Anna Hazare: NEET पेपर स्कैम
- NEET-UG 2026 की 3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं (खासकर अनुवाद संबंधी गड़बड़ियों) के आरोप लगे।
- NTA ने परीक्षा रद्द कर दी, फिर दोबारा (re-exam) कराई गई।
- इससे 22 लाख से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए। कई छात्रों की आत्महत्या की खबरें आईं, जिससे व्यापक आक्रोश फैला।
- CJP (अभिजीत दीपके के नेतृत्व में) जैसे युवा आंदोलन ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किए, जिसमें **धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा**, परीक्षा प्रणाली में सुधार, NTA पर सवाल और जवाबदेही की मांगें प्रमुख हैं।
- कांग्रेस, वामपंथी संगठन और अन्य विपक्षी दलों ने भी 40 दिन का अभियान (“छात्रों की गूंज”) चलाया। Sonam Wangchuk जैसे कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल की।
Anna Hazare का योगदान और पत्र
पत्र PM मोदी को: आंदोलन से एक दिन पहले (22 जुलाई) अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने:
- छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई और हिंसा को “बेहद दुखद” बताया।
- इसे कानून-व्यवस्था का मुद्दा न मानकर समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखने की अपील की।
- संवाद, विश्वास का माहौल और सकारात्मक समाधान की बात की।
- मंत्री के इस्तीफे को जवाबदेही का प्रतीक बताया — सरकार गिरने से नहीं, बल्कि सुशासन मजबूत होने से फायदा होगा।
- मौन आंदोलन के दौरान अन्ना भावुक भी हुए। उन्होंने मंदिर में दर्शन भी किए।
Anna Hazare का पहला आंदोलन और महत्व
- अन्ना हजारे 2011 के लोकपाल आंदोलन के प्रतीक हैं। उनका समर्थन छात्र आंदोलन को नैतिक और राष्ट्रीय वैधता देता है, खासकर युवाओं के मुद्दे पर।
- यह 15 साल बाद उनका मैदान में सक्रिय रूप है। CJP आंदोलन को और मजबूती मिली है।
- सरकार की ओर से अभी तक कोई बड़ा जवाब नहीं आया है, लेकिन विपक्ष और छात्रों का दबाव जारी है।





