Batla House Movie Review: जॉन अब्राहम की फिल्म बाटला हाउस सत्य एवम दमदार कहानी पर आधारित है

आज 73वे स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जॉन अब्राहम की बहुप्रतीक्षित फिल्म बाटला हाउस बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हो गई है। फिल्म में जॉन अब्राहम डीसीपी संजीव कुमार की भूमिका निभा रहे हैं। जिन पर दिल्ली के जामिया नगर इलाके में साल 2008 में फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप लगा था।

Batla House Movie Review

जॉन अब्राहम और मृणाल ठाकुर की फिल्म बाटला हाउस 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के बाटला हाउस में हुए एनकाउंटर पर आधारित है। इस फिल्म में जॉन अब्राहम डीसीपी संजीव कुमार की भूमिका निभा रहे है। डीसीपी संजीव कुमार को राष्ट्रपति से पुलिस सेवा के लिए अवॉर्ड मिल चूका है। वहीं बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद उन पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप भी लगा था। जिसने बाद में राजनितिक रंग भी लिया था। इस एनकाउंटर की चारों तरफ चर्चा हुई थी।

बाटला हाउस एनकाउंटर की कहानी

इस एनकाउंटर में दो लड़कों के साथ एक पुलिस अफसर की भी मौत हुई थी। फिल्म के जरिए दर्शक बाटला हाउस एनकाउंटर की कहानी को देख सकेंगे। फिल्म की कहानी में खास बात ये है कि इसकी कहानी अच्छे से रिसर्च करके तैयार की गई है। फिल्म में हर किसी के नजरिए को साफ तौर पर दिखाया गया है। जिसमें मानवाधिकार आयोग ,पुलिस एनजीओ ,मीडिया और आम जनता शामिल है।

फिल्म बाटला हाउस उस सवाल का जवाब भी दे रही है जिसमें एक लड़के के सिर में गोली कैसे लगी ? इतनी फ़ोर्स होते हुए दो लोग कैसे बचकर निकल भागे ? हालांकि की फिल्म की कहानी एक पुलिस वाले की भूमिका को लेकर आगे बढ़ती है।

निखिल आडवाणी के निर्देशन में बनी फिल्म की कहानी में काफी कसाव देखने को मिल रहा है। जॉन अब्राहम ने डीसीपी संजीव कुमार की भूमिका बेहतरीन तरीके से निभाई है। मृणाल ठाकुर का अभिनय भी ज़बरदस्त है। किरदारों के अभिनय के अलावा फिल्म की एडिटिंग भी अच्छे तरीके से की गई है।

दूसरी तरफ अगर फिल्म की कमियों की बात करें तो इसकी लंबाई को थोड़ा कम किया जा सकता था। ख़ासतौर से पहले हाफ में कुछ दृश्यों को 8 से 11 मिनट तक एडिट करके कम किया जा सकता था। हालांकि फिल्म इस केस पर उठे सभी सवालों का जवाब दे रही है। लेकिन फिल्म को पुलिस के नजरिए से बनाया गया है। ऐसे में फिल्म को संतुलित कहने में थोड़ी झिझक होती है

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