ये है अमेठी से राहुल गांधी की हार का मुख्य कारण,अंदरखाने की बात

अमेठी से राहुल गांधी की हार का पता लगाने के लिए कांग्रेस ने दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने राहुल की हार के मुख्य कारणों का पता लगाकर जांच कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपी।

‘लोक सभा चुनाव 2019’ के बाद कांग्रेस में उथल-पुथल जारी है। पार्टी में बैठकों का दौर जारी है। कांग्रेस में और पुरे देश में सबसे ज्यादा चर्चा राहुल गांधी की कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाली सीट अमेठी से हार की हो रही है। हार का पता लगाने के लिए कांग्रेस ने दो सदस्यीय समिति का गठन किया ,जिसने राहुल की हार के कारणों का पता लगाया है। समिति ने पाया की राहुल की हार का मुख्य कारण अमेठी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी का सहयोग न मिलना बताया।

‘रायबरेली’ से सीट पर सोनिया गाँधी का प्रतिनिधित्व कर रहे कांग्रेस सचिव जुबेर खान और केएल शर्मा बताया गया कि अमेठी में ‘सपा’ और ‘बसपा’ की इकाई ने कांग्रेस का सहयोग नही किया।उनके एक बड़े वर्ग का वोट भाजपा की स्मृति ईरानी को गया। हालांकि राहुल गांधी को इस बार 2014 से ज्यादा वोट मिले। साल 2014 में राहुल को 4.08 लाख वोट मिले थे जबकि इस बार 2019 में 4.13 लाख मिले।

साल 2014 में बहुजन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को 75716 वोट मिले थे। यही वोट अगर इस बार राहुल गांधी को मिल जाते तो जीत निश्चित थी। स्मृति ईरानी ने इस बार राहुल गाँधी को 55 हजार वोटों के अंतर से हराया।

अमेठी से कांग्रेस के जिला अध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने बताया की समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के पुत्र अनिल प्रजापति खुलेआम भारतीय जनता पार्टी की स्मृति ईरानी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी की चार विधानसभाओं में करारी हार मिली। गौरीगंज विधानसभा में राहुल की हार का सबसे ज्यादा अंतर 18000 वोटों का रहा। राहुल अमेठी में स्मृति ईरानी से आगे रहे लेकिन तिलाई ,सलोन और जगदीशपुर विधानसभाओं में पिछड़ गए।

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