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ACP Manasvi Vashishtha suspended: दिल्ली पुलिस में हलचल

ACP Manasvi Vashishtha suspended: दिल्ली पुलिस में हलचल, 26

ACP Manasvi Vashishtha suspended हो गए हैं। Delhi Police मुख्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन के बाद गृह मंत्रालय ने कार्रवाई की। पूरी खबर पढ़ें।

ACP Manasvi Vashishtha suspended: जाने वजह

दिल्ली पुलिस के भीतर पिछले कुछ दिनों से जो बेचैनी चल रही थी, वह अब एक बड़े फैसले तक पहुंच गई है। दिल्ली पुलिस के एसीपी मनस्वी वशिष्ठ निलंबित कर दिए गए हैं। सोमवार को पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर पुलिसकर्मियों के विरोध प्रदर्शन के बाद गृह मंत्रालय ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया। राजधानी की पुलिस के इतिहास में ऐसा नजारा कम ही देखने को मिलता है, जब खाकी वर्दीवाले खुद अपने ही मुख्यालय के सामने खड़े होकर सवाल पूछें।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई ?

मामला पूर्वी दिल्ली के शाहदरा थाने से जुड़ा है। वकीलों का आरोप था कि पुलिस स्टेशन में हुई कहासुनी के दौरान एक वकील को चोट लगी थी। वकीलों का यह भी कहना था कि जिन लोगों के खिलाफ शिकायत की गई थी, उन्हें गिरफ्तार करने के बजाए छोड़ दिया गया।

दबाव बढ़ने के बाद 28 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर सब-डिवीजन से हटाकर महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष पुलिस इकाई SPUWAK में भेज दिया। शाहदरा के SHO अरुण कुमार का भी तबादला हुआ। इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी।

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर क्या हुआ ?

तबादले से वकील शांत हुए। लेकिन पुलिस के एक वर्ग में नाराजगी बढ़ गई। उनका कहना था कि अधिकारी को दबाव में हटाया गया, जबकि वकीलों पर कोई तुलनात्मक कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस के व्हाट्सएप ग्रुपों में सोमवार को मुख्यालय पहुंचने की अपील घूमती रही।

सोमवार को करीब 80 पुलिसकर्मी हेडक्वार्टर के बाहर जमा हुए। उन्होंने तबादलों को रद्द करने की मांग उठाई। पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारी पुलिस वालों को समझाते रहे कि अंदर आकर बात करें।

ACP Manasvi Vashishtha का अपील वीडियो

एसीपी मनस्वी ने एक वीडियो जारी कर अपने साथियों को प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उनका सवाल था कि अगर थाने के भीतर ही पुलिस सुरक्षित नहीं है तो वह दूसरों की सुरक्षा कैसे करेंगे। बाद में दिल्ली पुलिस आयुक्त ने प्रदर्शनकारी पुलिस कर्मियों से बात की पुलिसकर्मियों ने अपनी पांच मांगे रखीं और यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने वालों पर कोई कार्रवाई न हो।

एसीपी मनस्वी का निलंबन और माने

सेवा नियमों के लिहाज से पुलिस बल में अनुशासन सबसे ऊपर माना जाता है। पुलिस हेडक्वार्टर के सामने प्रदर्शन को अनुशासनहीनता की नजर से देखा गया। इसी वजह से गृह मंत्रालय ने यह सख्त कदम उठाया।

दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन आती है, इसलिए अंतिम फैसला मंत्रालय के स्तर पर होता है। निलंबन का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है। यह विभागीय कार्रवाई का शुरुआत चरण है। जिसके बाद जांच होती है और अधिकारी को अपनी तरफ से पक्ष रखने का मौका दिया जाता है।

वकीलों और पुलिस पक्ष की दलीलें 

वकील समुदाय कहना है कि अदालत परिसर और थानों में उनके साथ दबंगई नहीं होनी चाहिए। पुलिस वालों का कहना है की उनके सम्मान और सुरक्षा की अनदेखी हो रही है। दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। यह भी सच है कि वकीलों और पुलिस का टकराव दिल्ली में नया नहीं है। 2019 में तीस हजारी कोर्ट की घटना के बाद भी पुलिसकर्मी मुख्यालय के बाहर धरने पर उतरे थे। जरूरत इस बात की है कि निष्पक्ष जांच से सच सामने आए और दोनों पक्षों का भरोसा बना रहे।

अब क्या होगा ? 

अब नजर विभागीय जांच,अधिकारी की सफाई और प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों पर संभावित कार्रवाई पर रहेगी। इस पुरे घटनाक्रम का असर दिल्ली पुलिस के मनोबल और पुलिस-वकीलों के रिश्ते पर लंबे समय तक दिख सकता है। जैसे ही गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की तरफ से कोई ब्यान आएगा, इस खबर को अपडेट कर दिया जाएगा।

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