Pegasus Espionage Case :जानिए क्या है Pegasus जासूसी मामला? जिस पर घिरी हुई है केंद्र सरकार और कौन हुआ हैकिंग का शिकार

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जानिए क्या है Pegasus जासूसी मामला? जिस पर घिरी हुई है केंद्र सरकार और कौन हुआ हैकिंग का शिकार
फोटोः पेगासस

इजराइल की कंपनी NSO के Pegasus सॉफ्टवेयर से भारत में कथित रूप से 300 से ज्यादा हस्तियों के फोन हैक किए जाने का मामला अब जोर पकड़ता जा रहा है।

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के 1 दिन पहले से जासूसी कांड का खुलासा हुआ था। यह दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों को फोन हैक किए गए हैं। उनमें कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और भारत के पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर सहित द वायर के पत्रकारों सहित कई मीडिया संगठनों के पत्रकारों के फोन हैक हुए हैं।

पेगासस सॉफ्टवेयर दुनिया में सबसे ज्यादा खतरनाक स्पाईवेयर

हालांकि केंद्र सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और रिपोर्ट जारी होने की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आइए आज हम आपको बताते हैं कि इस मामले में क्या और कब कैसे क्या हुआ । पेगासस सॉफ्टवेयर दुनिया में सबसे ज्यादा खतरनाक स्पाईवेयर माना जाता है।

16 मीडिया संगठनों ने किया खुलासा 

वैश्विक स्तर के 16 मीडिया संगठनों द्वारा खुलासे के बाद जांच और सबूत सामने आए आए हैं कि इजराइल स्थित कंपनी एनएसओ ग्रुप के सैन्य दर्जे के मालवेयर का इस्तेमाल पत्रकारों और राजनीतिज्ञों, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं, असंतुष्ट की जासूसी करने के लिए किया गया है। पेरिस स्थित फोरबिडेन स्टोरीज और मानव अधिकार समूह, एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा हासिल की गई जानकारी साझा की गई है। इस जानकारी को उन्होंने 16 समाचार संगठनों के साथ साझा किया है। जिसमें 50000 से अधिक मोबाइल नंबर से पत्रकारों ने 50 देशों के 1000 से अधिक व्यक्तियों की पहचान की है। जिन्हें एनएसओ के ग्राहकों ने संभावित निगरानी के लिए कथित तौर पर चुना था।

फोरबिडेन स्टोरीज का खुलासा 

फोरबिडेन स्टोरीज के अनुसार 189 पत्रकार, 600 से अधिक नेता एवं सरकारी अधिकारी कम से कम 65 बिजनेसमैन और 85 मानव अधिकार कार्यकर्ता और कई राष्ट्रीय अध्यक्ष भी शामिल है।

हैकिंग का शिकार हुए पत्रकार- एसोसिएटेड प्रेस, राइटर, सीएनएन, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, ले मोंटे और द फाइनेंशियल टाइम्स जैसे संगठनों के लिए काम करते हैं। एनएसओ ग्रुप के स्पाइवेयर को मुख्य रूप से पश्चिम एशिया और मेक्सिको में लक्षित निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने के आरोप हैं। सऊदी अरब को एनएसओ के ग्राहकों में से एक बताया जाता है। इसके अलावा इस सूची में भारत , हंगरी ,फ्रांस अज़रबैजान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान सहित कई देश शामिल हैं। इस सूची में मेक्सिको के सर्वाधिक फोन नंबर है। मैक्सिको के 15000 नंबर हैं।

ये लोग हुए हैकिंग का शिकार 

कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, भारतीय जनता पार्टी के मंत्रियों, अश्वनी वैष्णव और प्रह्लाद सिंह पटेल, पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उन लोगों में शामिल हैं। जिनके फोन नंबरों की इजरायली कंपनी एनएसओ द्वारा हैकिंग की गई।

सोमवार के दिन एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने इस बात की जानकारी को साझा किया था

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे तथा टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी , भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर अप्रैल 2019 में उन्हीं की एक कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, उच्च न्यायालय में काम करने वाली उस औरत के रिश्तेदारों से जुड़े 11 फोन नंबर NSO के निशाने पर थे।

राहुल और केंद्रीय मंत्री वैष्णव और प्रहलाद सिंह पटेल के अलावा जिन लोगों के फोन नंबरों को निशाना बनाया गया है। उनमें चुनाव पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स इन इंडिया के संस्थापक जगदीप छोकर और वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट गगनदीप शामिल है।

भाजपा के नेताओं के फोन भी हुए हैक 

रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के निजी सचिव और संजय का नाम की शामिल है । जो साल 2014 से लेकर 2019 के बीच केंद्रीय मंत्री के रूप में स्मृति ईरानी से पहले कार्यकाल के दौरान उनके विशेष कार्यकारी अधिकारी थे। इस सूची में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े अन्य छोटे नेताओं और विश्व हिंदू परिषद के प्रवीण तोगड़िया के नंबर भी शामिल हैं।

सोमवार के दिन फोरबिडेन स्टोरीज द्वारा जारी गई एक रिपोर्ट की पहली किस्त में दावा किया गया है कि 40 भारतीय पत्रकारों सहित दुनिया भर के 180 पत्रकारों के फोन हैक किए गए हैं। इन में हिंदुस्तान टाइम्स और मिंट के तीन पत्रकारों के अलावा फाइनैंशल टाइम्स के संपादक रोला खलाफ तथा इंडिया टुडे, नेटवर्क 18 , द हिंदू , द इंडियन एक्सप्रेस, द वाल स्ट्रीट जनरल, टाइम्स के संवादाताओं के मोबाइल फोन शामिल है। जांच में दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर, जून 2018 से 2020 के बीच एल्गार परिषद के मामले में गिरफ्तार 8 कार्यकर्ताओं के फोन भी हैक किए जाने का दावा किया गया है।

भारत सरकार ने क्या कहा ?

केंद्र सरकार ने जांच को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा,” इस तथाकथित रिपोर्ट के लीक होने का समय और फिर संसद में यह व्यवधान इसे जोड़कर देखने की आवश्यकता है। यह एक विघटनकारी वैश्विक संगठन है। जो भारत की प्रगति को पसंद नहीं करता है। अवरोधक भारत में राजनीति खिलाड़ी है, जो नहीं चाहते कि भारत प्रगति करें। भारत के लोग इस घटना और संबंध को समझने में बहुत परिपक्व हैं।”

अमित शाह ने आगे कहा,” कल देर शाम हमने एक रिपोर्ट देखी। जिसे केवल एक ही उद्देश्य के साथ कुछ ग्रुपों द्वारा शेयर किया गया है। सरकार ने कहा कि भारत में अवैध ढंग से इस प्रकार की जासूसी करना संभव नहीं है।”

जांच एमनेस्टी इंटरनेशनल और फोरबिडेन स्टोरीज को प्राप्त लगभग 4000 नामों और नंबरों पर आधारित है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इनमें 87 फोन की फॉरेंसिक जांच की है। जिसमें से 23 फोन हैक मिले हैं। जबकि 14 अन्य में सेंधमारी की कोशिश की गई है। और द वायर का खुलासा है कि भारत में भी 10 फोन की फॉरेंसिक जांच कराई गई है।

एनएसओ का दावा 

वही इजरायली कंपनी एनएसओ का कहना है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल और फोरबिडेन स्टोरीज का डाटा गुमराह करता है। यह डाटा उन नंबरों का नहीं हो सकता, जिन की सरकारों ने निगरानी की है। इसके अलावा अन्य अपने ग्राहकों की खुफिया निगरानी गतिविधियों से वाकिफ नहीं है।

कैसे करता है हैकिंग 

हैकिंग सॉफ्टवेयर पेगासस संबंधित फोन पर आने जाने वाले कॉल का ब्यौरा जुटाने में सक्षम है । फोन में मौजूद मीडिया फाइल, दस्तावेज के अलावा उन सभी आने जाने वाले संदेश ईमेल और सोशल मीडिया मैसेज की भी जानकारी दे सकता है। पेगासस सॉफ्टवेयर को जासूसी के क्षेत्र में एक अचूक हथियार माना जाता है। तकनीकी जानकारों के अनुसार इससे व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एप भी सुरक्षित नहीं है। यह फोन में मौजूद एंड टू एंड इंक्रिप्टेड चैट को भी पढ़ सकता है। पेगासस स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर है। जिसे इजराइली साइबर सुरक्षा कंपनी ग्रुप के NSO  टेक्नोलॉजी ने बनाया है।

कैसे करता है हैकिंग 

यह एक ऐसा प्रोग्राम है जिसे अगर किसी स्मार्टफोन में डाल दिया जाए तो कोई भी हैकर स्मार्टफोन के माइक्रोफोन कैमरा, ऑडियो, टेक्स्ट मैसेज ईमेल लोकेशन की जानकारी हासिल कर सकता है।

इस सॉफ्टवेयर को किसी भी फोन में सिर्फ एक मिस कॉल के जरिए इंस्टॉल किया जा सकता है। इससे यूजर की इजाजत और जानकारी के बिना भी फोन में डाला जा सकता है। एक बार फोन में इंसटाल हो जाने के बाद इसे हटाना आसान नहीं है।

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