Maharani Kamsundari Devi

Maharani Kamsundari Devi: दरभंगा की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का 94 वर्ष की उम्र में निधन, भारत चीन युद्ध के समय दान कर दिया था 600 किलो सोना

Maharani Kamsundari Devi passes: दरभंगा की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी को सोमवार 12 जनवरी 2026 को उनके निवास स्थान पर निधन हो गया है। वे 94 वर्ष की थीं।

महारानी कामसुंदरी देवी का 94 वर्ष की उम्र में निधन

महारानी कामसुंदरी देवी पिछले कई महीनों से अस्वस्थ चल रही थीं। उनका निधन प्राकृतिक कारणों से हुआ है।यह घटना पूर्वी भारत की एक राजसी विरासत, दरभंगा राज की एक अंतिम जीवित कड़ी के रूप में देखी जा रही है। जो एक युग के अंत का प्रतिक है। उनका अंतिम संस्कार दरभंगा के श्यामा माई मंदिर परिसर में किया गया।  जहां उनके परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।

कुछ लोगों का मानना है कि उनके अहम योगदान को देखते हुए महारानी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई नहीं दी गई। जो दुखद बात मानी जा रही है।

Maharani Kamsundari Devi का परिवार

महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा राज के अंतिम महाराजाधिराज सर कामेश्श्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं। उनकी शादी 1940 के दशक में हुई थीं। महाराजा कामेश्वर सिंह ब्रिटिश काल में देश के सबसे अमीर जमींदारों में से एक था। राजा कामेश्वर सिंह का निधन 1962 में हो गया था। महाराज कामेश्वर की तीन शादियों में से कोई संतान नहीं हुई। इसलिए महारानी काम सुंदरी देवी के भी कोई बच्चे नहीं थे। महाराज की पहली पत्नी राजलक्ष्मी देवी का 1976 में निधन हो गया था। दूसरी पत्नी का निधन कामेश्वरी प्रिया का निधन 1956 में ही हो गया था।

महारानी काम सुंदरी देवी ने संभाला दरभंगा का राज

Maharani Kamsundari Deviपति की मौत के बाद महारानी काम सुंदरी देवी ने दरभंगा राज की धार्मिक,सांस्कृतिक और परोपकारी जिम्मेदारियों को संभालने के लिए परिवार की एक कोलैटरल शाखा से कुमार कपिलेश्वर सिंह ट्रस्टी नियुक्त किया। परिवार के सदस्यों ने उन्हें दयालु, सादगीपूर्ण और मूल्यों से जुडी महिला के रूप में याद किया। जो सार्वजनिक जीवन से दूर रहकर भी विरासत को संरक्षित रखने में सक्रिय रहीं।

Maharani Kamsundari Devi देवी के नेक काम

Maharani Kamsundari Devi का जीवन सादगी, गरिमा और सेवा से भरा रहा। वे कभी सिंहासन पर नहीं बैठीं लेकिन अपने नेक कार्यों से लोगों के दिलों पर राज किया। पति की मौत के बाद उन्होंने अपना जीवन परोपकार और सांस्कृतिक संरक्षण को समर्पित कर दिया।

Maharani Kamsundari Devi का योगदान 

1962 के भारत चीन युद्ध में Maharani Kamsundari Devi ने देश की रक्षा के लिए 600 किलो सोना, 3 विमान और 90 एकड़ जमीन दान की। यह एक ऐसा कदम था जो राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा का प्रतीक बना। उन्होंने युद्ध के असुरक्षा के माहौल में देशवासियों को प्रेरणा दी।

Maharani Kamsundari Devi का दूसरा नाम 

महारानी कामसुंदरी देवी को महारानी कल्याणी देवी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने पति की स्मृति में कल्याणी फाउंडेशन बनाया। जो शिक्षा, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों में सक्रिय है। उन्होंने एक बड़ी पब्लिक लायब्रेरी स्थापित की। जिसमें 15000 से अधिक किताबें हैं। जो क्षेत्र में शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यों में महत्वपूण्र योगदान दे रही है।

Maharani Kamsundari Devi के परोपकारी कार्य 

अपने जीवनकाल में वे शैक्षिक,सामाजिक और धार्मिक कार्यों से जुडी रहीं। जिसमें मिथिला की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण शामिल है। उनके कार्यों में देशभक्ति, बलिदान और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना झलकती है। मिथिला के लोग उन्हें प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में याद कर रहे हैं।

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