Rinku Hooda: एशियन पैरा गेम्स 2026 में रिंकू हुड्डा ने पुरुष जैवलिन थ्रो F46 में 65.11 मीटर थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। अजीत सिंह ने सिल्वर मेडल हासिल किया। भारत का वन-टू फिनिश।
Rinku Hooda ने एशियन पैरा गेम्स में जीता गोल्ड
जापान के ऐची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत के पैरा एथलीट रिंकू हुड्डा ने सोमवार को पुरुषों की जैवलिन थ्रो F46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत लिया। उन्होंने 65.11 मीटर का थ्रो कर गोल्ड अपने नाम किया।
अजीत सिंह ने सिल्वर मेडल जीता
उसी इवेंट में अजीत सिंह ने 65.02 मीटर थ्रो कर सिल्वर मेडल हासिल किया। दोनों भारतीय खिलाड़ियों के बीच सिर्फ 9 सेंटीमीटर का अंतर रहा। इंडोनेशिया के सक्त्योनोंो ने 55.30 मीटर थ्रो कर कांस्य पदक जीता।
यह स्पर्धा सिर्फ तीन खिलाड़ियों के बीच हुई। भारत ने टॉप दो पोजिशन पर कब्जा जमाया। रिंकू ने आखिरी थ्रो में अपना बेस्ट परफॉर्मेंस दिखाया और गोल्ड पक्का किया।
Rinku Hooda की कहानी
रिंकू हुड्डा हरियाणा के रोहतक जिले के धामर गांव से हैं। तीन साल की उम्र में खेत में हुए हादसे में उन्होंने बायां हाथ खो दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2013 में जैवलिन थ्रो शुरू किया और लगातार आगे बढ़ते रहे।
उन्होंने 2025 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था। 2022 एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर और 2018 में ब्रॉन्ज भी उनके खाते में है। इस गोल्ड के साथ उन्होंने एशियन पैरा गेम्स में मेडल का पूरा सेट पूरा कर लिया।
पैरा एथलेटिक्स में भारत का मजबूत प्रदर्शन
F46 कैटेगरी उन एथलीट्स के लिए है जिनके एक हाथ में विकलांगता है। भारत इस इवेंट में पहले भी अच्छा प्रदर्शन कर चुका है। 2022 में तो पूरा पोडियम भारत के पास था।
एशियन पैरा गेम्स 2026 18 से 24 अक्टूबर तक चल रहे हैं। भारत पहले ही कई मेडल जीत चुका है। रिंकू हुड्डा का यह गोल्ड देश के लिए गर्व का पल है। रिंकू हुड्डा और अजीत सिंह दोनों को बधाई। उनकी मेहनत और संघर्ष युवा पैरा एथलीट्स के लिए प्रेरणा है।






