Prabal Pratap

Prabal Pratap कौन है ? जिसने SC में CJI को दी G#li

Prabal Pratap या प्रबल प्रताप सिंह यादव एक साधारण  पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति हैं। वे उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के भरथना तहसील के गांव नगला जयलाल भोली के रहने वाले हैं।

Prabal Pratap की शिक्षा

प्रबल प्रताप सिंह यादव वर्तमान में लखनऊ यूंनिवर्सिटी से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं। दैनिक जागरण न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, माँ कुंती देवी ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा भरथना एसवी इंटरकॉलेज से हुई। इसके बाद उन्होंने सुतियानी स्थित एसएस मेमोरियल कॉलेज से स्नातक और हैवरा डिग्री कॉलेज से बीएड की पढ़ाई पूरी की। वह एलएलबी करने के लिए दो वर्ष पहले लखनऊ चले गए थे।

Prabal Pratap का परिवार

पिता छोटे किसान (ढाई बीघा खेती) हैं और भरथना कस्बे में प्राइवेट दुकान पर काम करते हैं। मां का नाम कुंती देवी है। दो शादीशुदा बहनें हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य/साधारण है। घर में बुनियादी सुविधाएं भी सीमित हैं।

Prabal Pratap ने CJI को दी G#li

यह घटना CJI सूर्य कांत की मौजूदगी/संबंध में हुई, लेकिन CJI उस बेंच पर नहीं थे। सुनवाई Justice K.V. Viswanathan और Justice Alok Aradhe की बेंच के सामने Courtroom 13 में हो रही थी।

Prabal Pratap ने SC में क्या कहा ?

  • प्रबल प्रताप Allahabad High Court के आदेश को चुनौती दे रहे थे। मूल मुद्दा: लखनऊ (Vikas Nagar, ACP) में साइबर फ्रॉड/क्राइम की शिकायत पर FIR दर्ज न करने की शिकायत। हाईकोर्ट/ट्रायल कोर्ट ने इसे प्राइवेट कंप्लेंट के रूप में ट्रीट किया था।
  • उन्होंने खुद को “sovereign” बताया और जजों को “Mr. Judicial Servant” (न्यायिक सेवक) कहकर संबोधित किया। उन्होंने बेंच को FIR दर्ज कराने का “आदेश” देने की कोशिश की।
  • Justice Viswanathan ने आश्चर्य से पूछा: “You are ordering us?”
  • फिर उन्होंने 155 पन्नों की फाइल के कागज हवा में उछाल दिए, CJI सूर्य कांत को अपशब्द/गालियां दीं और हंगामा किया। सुरक्षा ने उन्हें बाहर निकाला।
कोर्ट का रुख

बेंच ने contempt of court की कोई कार्रवाई नहीं की। Justice Viswanathan ने कहा कि याचिकाकर्ता “very disturbed” और “frustrated” लग रहे थे, इसलिए “We only have sympathies for him”। केस मेरिट पर खारिज कर दिया गया (Allahabad HC के आदेश में दखल नहीं दिया)।

वीडियो वायरल होने के बाद इस घटना पर काफी चर्चा हुई। कुछ लोग न्यायिक देरी/पुलिस निष्क्रियता पर उनकी नाराजगी को समझते हैं, लेकिन ज्यादातर इसे अदालत की गरिमा का अपमान मानते हैं। Supreme Court Bar Association ने भी मजबूत कार्रवाई की मांग की।

POST : Jul 12, 2026 at 09:43

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